विधानसभा सत्र से दो दिन पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधायक विकास निधि के तहत एक-एक करोड़ रुपये धनराशि मंजूर कर दी। कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के कारण गहराए आर्थिक संकट के चलते सरकार के हाथ बंधे थे और वह विकास निधि जारी नहीं कर पा रही थी। अपने चुनाव क्षेत्रों के विकास को लेकर विधायक भी व्यथित दिखाई दे रहे थे।
लेकिन अब विकास निधि जारी होने के साथ ही सभी विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों में गति आने के आसार हैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2020-21 की विकास निधि में से प्रदेश के 71 विधायकों को एक-एक करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है। बता दें कि प्रदेश में विधायकों को पौने तीन करोड़ रुपये की विधायक विकास निधि दी जाती है। लेकिन कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण उपजे आर्थिक हालातों के देखते हुए प्रदेश सरकार ने सभी विधायकों की एक साल की विधायक निधि कोविड फंड में डाल दी।
लेकिन चुनाव से ठीक डेढ़ साल पहले विधायक निधि पर रोक लग जाने से विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के कई विधायक भी असहज हो गए। कुछ विधायकों ने विधायक निधि के लिए सरकार से खुलकर गुहार लगाई तो कुछ ने बंद कमरों में मंत्रणा कर अपना दुखड़ा सुनाया। उनका कहना था कि उनके पास अपने चुनाव क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए कोई फंड नहीं बचा है। मुख्यमंत्री ने उनकी व्यथा को समझा और सोमवार को विधायक निधि की स्वीकृति प्रदान कर दी।
इस निधि से विधायकों को अपने क्षेत्रों में क्षेत्रीय आवश्यकता के अनुरूप विकास कार्य करने में मदद मिलेगी। विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों में भी तेजी आएगी।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री