लॉकडाउन में फंसे बिहार के प्रवासियों को भेजने के लिए शुक्रवार को रवाना की जाने वाली विशेष श्रमिक स्पेशल ट्रेन, यात्रियों की संख्या कम होने पर ऐन मौके पर निरस्त की। कई यात्री स्टेशन भी पहुंच गए थे। लेकिन, बाद में सभी को लौटा दिया गया। इस पर प्रवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा और नाराजगी भी जताई।
शुक्रवार को देहरादून से सीतामढ़ी, सिवान, छपरा के लिए ट्रेन भेजी जानी थी। स्टेशन निदेशक गणेश ठाकुर ने बताया कि सहायक नोडल अधिकारी श्रमिक प्रवास झरना कमठान की ओर से डीआरएम को पत्र भेजकर ट्रेन न चलाने का अनुरोध किया था। इस पर ट्रेन को निरस्त किया गया। सहायक नोडल अधिकारी झरना कमठान ने बताया कि बिहार सरकार ने अनुरोध किया है कि जब तक ट्रेन में यात्री पूरे न हो तब तक रवाना न किया जाए।
देहरादून से छपरा, सिवान जाने वाली विशेष ट्रेन में यात्रियों की संख्या बहुत कम थी। जिसकी वजह से ट्रेन को रवाना नहीं किया। अब तक बिहार और झारखंड के लिए छह ट्रेनें भेजी जा चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि लॉकडाउन में ढील दिए जाने पर अब प्रवासी अपने-अपने राज्यों को जाने के इच्छुक भी नहीं हैं। इसके अलावा रेलवे की ओर से 200 से अधिक ट्रेनों का संचालन भी कर दिया है। इनमें भी यात्री जा रहे हैं।
कोरोना संकट के बीच केंद्र सरकार के निर्देश पर रेलवे बोर्ड ने देहरादून से नई दिल्ली और देहरादून से काठगोदाम जाने वाली जनशताब्दी का संचालन बेशक शुरू कर दिया है। लेकिन, इसके लिए पर्याप्त यात्री नहीं मिल रहे हैं। शुक्रवार को देहरादून से नई दिल्ली जाने वाली जनशताब्दी में जहां 269 यात्रियों ने सफर किया, वहीं दून से काठगोदाम जाने वाली जनशताब्दी में 201 यात्रियों ने आरक्षण कराया।
यह स्थिति तब है जबकि दोनों में सीटों की क्षमता 600 है। जबकि लॉकडाउन से पहले इनमें एक-एक सीट के लिए मारामारी रहती थी। स्टेशन निदेशक गणेशचंद ठाकुर ने बताया कि पिछले पांच दिनों से दोनों जनशताब्दी में यात्रियों की संख्या कम है। 300 से भी कम यात्री सफर कर रहे हैं। इस समय यात्री ट्रेनों में यात्रा से परहेज कर रहे हैं। इससे आला अधिकारियों को अवगत करा दिया है।
200 विशेष ट्रेनों के सामान्य कोच में आरक्षण की सुविधा
स्टेशन निदेशक गणेशचंद ठाकुर ने बताया कि फिलहाल रेलवे बोर्ड ने जिन 200 विशेष ट्रेनों को संचालित किया है उसमें सामान्य कोच में भी सीटों के आरक्षण की व्यवस्था की है। साधारण कोच में सिर्फ उतने ही यात्रियों को यात्रा की अनुमति है जितनी सीटें हैं। लेकिन भविष्य में यदि सभी ट्रेनों को संचालन होता है तो यह बाध्यता समाप्त भी हो सकती है।