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Corona in Uttarakhand: कोरोना की दहशत और कई चुनौतियों के साथ बीता एक साल

Tue, 16 Mar 2021 07:17 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • 15 मार्च 2020 देहरादून में मिला था पहला मरीज, सबसे पहले एफआरआई में हुआ था लॉकडाउन
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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पिछला पूरा साल उत्तराखंड में कोरोना महामारी की दहशत और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने की कशमकश में बीत गया। प्रदेश में कोरोना का पहला मरीज ठीक एक साल पहले 15 मार्च को देहरादून में मिला था। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के प्रशिक्षु आईएफएस अफसर में कोरोना की पुष्टि होने पर 15 मार्च की शाम को उन्हें राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

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फीनलैंड, स्पेन और रूस आदि देशों से प्रशिक्षण लेकर अकादमी के 62 प्रशिक्षु अधिकारी देहरादून लौटे थे। विदेश से आने पर संस्थान ने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी। कोरोना का पहला मरीज सामने आने पर हड़कंप मच गया था। प्रशासन ने आनन-फानन में पूरी अकादमी और वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) को लॉकडाउन कर दिया था। वहीं, प्रशिक्षु दल को 14 दिन के एकांतवास में भेजा गया था। इस बीच तीन और प्रशिक्षु आईएफएस में कोरोना की पुष्टि हुई। तीनों को राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

सिर्फ हल्द्वानी में थी जांच की सुविधा
प्रदेश में राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में ही कोरोना की जांच की सुविधा थी। पूरे प्रदेश से सैंपल हल्द्वानी भेजे जा रहे थे। जिससे रिपोर्ट आने में देरी हो रही थी। इससे मरीजों को क्वारंटीन करने में भी समय लग रहा था। जिससे संक्रमण का प्रसार तेजी से हो रहा था। कुछ हफ्ते बाद आईसीएमआर नई दिल्ली ने राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, ऋषिकेश एम्स और कुछ अन्य निजी अस्पतालों, पैथोलॉजी केंद्रों को जांच के लिए अधिकृत किया।
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दून अस्पताल को बनाया कोविड अस्पताल 
कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर सरकार ने राजकीय दून मेडिकल कॉलेज को पूरी तरह से कोविड अस्पताल के रूप में तब्दील कर दिया। शुरू में 25 बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किए गए थे। वहीं धीरे-धीरे पूरा अस्पताल कोरोना और संदिग्ध कोरोना मरीजों के लिए समर्पित कर दिया गया। वहां से अन्य सभी मरीजों को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया गया। गर्भवती महिलाओं की जांच और डिलीवरी का जिम्मा गांधी शताब्दी अस्पताल को दिया गया। एक समय ऐसा भी आया जब दून अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए बेड ही नहीं बचे थे। इसे देखते हुए सरकार ने कुछ निजी अस्पतालों को भी कोरोना मरीजों के उपचार के लिए अलग से व्यवस्था करने के निर्देेश दिए। जिसके बाद दून अस्पताल पर कुछ दबाव कम हुआ।

स्वास्थ्य सुविधाओं में हुआ सुधार
कोरोना के चलते प्रदेश के सबसे बड़े अस्पतालों में शुमार दून अस्पताल की व्यवस्थाएं भी सुधरीं। जब कोरोना का पहला मरीज सामने आया था, तब अस्पताल में सिर्फ पांच आईसीयू बेड थे। चूंकि, कोरोना में सबसे ज्यादा फेफड़ों पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसलिए आईसीयू और वेंटिलेटर की जरूरत महसूस होने लगी थी। अब दून अस्पताल में वेंटिलेटर युक्त 100 आईसीयू बेड हैं। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि फिलहाल कोरोना संक्रमण के प्रसार के घटते क्रम को देखते हुए अन्य मरीजों के लिए भी सुविधाएं शुरू कर दी गई हैं। कोरोना मरीजों के लिए पुराना प्रशासनिक भवन में वार्ड तैयार कर उन्हें वहां भर्ती किया जा रहा है। साथ ही ऑपरेशन भी शुरू कर दिए गए हैं।

डॉक्टर और कर्मचारी भी हुए कोरोना से संक्रमित

कोरोना मरीजों की जांच और उपचार के दौरान धीरे-धीरे डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को भी कोरोना संक्रमण होने लगा। इससे उनके परिवार वाले भी दहशत में आ गए। ऐसे में बीच-बीच में उच्चाधिकारियों द्वारा उनका उत्साह बढ़ाया गया। साथ ही उनके परिवारों को कोरोना से बचाने के लिए उनके लिए गढ़वाल मंडल विकास निगम के द्रोण होटल और अन्य सरकारी आवासों को आरक्षित किया गया। कोरोना ड्यूटी के दौरान कई-कई दिन तक डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी अपने परिवार से नहीं मिल सके।

लोगों ने योग और आयुर्वेद का लिया सहारा 
कोरोना का कोई समुचित इलाज न होने के कारण डॉक्टर भी सलाह दे रहे थे कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना जरूरी है। इसे देखते हुए लोगों ने जहां योग और ध्यान का खूब सहारा लिया। वहीं, आयुर्वेद के काढ़ा, गिलोय जैसी दवाओं का भी खूब इस्तेमाल किया गया। इस दौरान आयुर्वेदिक दवाओं की जमकर बिक्री हुई। वहीं, सरकार ने भी आयुर्वेद काढ़ा और गिलोय जैसी दवाओं को लोगों के बीच बांटा।

दून में 30 हजार लोग हो चुके संक्रमित
देहरादून जिले में 14 मार्च तक 29921 लोगों को कोरोना संक्रमण हो चुुका था। इसमें से 28412 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि 102 मरीज अब भी संक्रमित हैं। वहीं, जिले में कोरोना संक्रमित 969 लोगों की मौत हो चुकी है। अब तक चार लाख 70 हजार 301 लोगों की कोरोना जांच हो चुकी है।
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लॉकडाउन में फंसे प्रवासियों के लिए वरदान बना रेलवे 

कोरोना फैलने के बाद जब केंद्र सरकार ने पूरे देश में कड़ाई से लॉकडाउन लागू किया गया तो न सिर्फ उत्तराखंड वरन देश के अन्य राज्यों में बड़ी संख्या में प्रवासी फंस गए। ट्रेनों, बसों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगाए जाने के बाद लाखों की संख्या में लोग तमाम राज्यों में फंस गए। सारी व्यावसायिक गतिविधियां बंद होने की वजह से प्रवासियों के सामने खाने-पीने का भी गंभीर संकट था। 

प्रवासियों को अपने घर पहुंचने की चिंता सता रही थी। ऐसे में केंद्र सरकार और रेलवे की ओर से प्रवासियों को बड़ी राहत देते हुए देहरादून से श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया। इसके जरिए यूपी, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात समेत कई राज्यों के प्रवासियों को न सिर्फ उत्तराखंड से इन राज्यों में पहुंचाया गया, वरन इन राज्यों में फंसे हजारों प्रवासियों को भी उत्तराखंड लाया गया। लॉकडाउन में फंसे प्रवासियों को केंद्र सरकार, रेलवे बोर्ड और राज्य सरकारों की ओर से मुफ्त यात्रा सुविधा मुहैया कराई गई। यात्रियों को बीमारी से बचाने के लिए मास्क, सैनिटाइजर देने के साथ ही खाने पीने का सामान भी मुहैया कराया गया। 

ट्रेनों को सैनिटाइज करने के साथ ही पूरे स्टेशन परिसर को भी सैनिटाइज किया गया। कोरोना को लेकर स्थितियां सामान्य होने के बाद अब रेलवे बोर्ड की ओर से देहरादून से संचालित होने वाली ज्यादातर ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया गया है। कुछ दैनिक ट्रेनों को सप्ताह में तीन दिन संचालित किया जा रहा है। हालांकि, रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्थितियां और सामान्य होने व यात्रियों की संख्या बढ़ने पर ट्रेनों का दैनिक संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
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