लॉक डाउन के कारण फंस गए और राशन की कमी से जूझ रहे लोगों को भोजन कराने के लिए नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने अपनी निधि से पांच लाख रुपये जारी किए हैं। सीडीओ को पत्र लिखकर इंदिरा ने कहा है कि उनकी निधि से यह राशि नैनीताल जिलाधिकारी को जारी की जाए। इंदिरा का कहना है कि लोग लॉक डाउन के कारण फंसे हुए हैं और इस कारण उन्हें खाने तक की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
हरक सिंह बांटेंगे 20 हजार कंबल
श्रम मंत्री हरक सिंह 20 हजार कंबल बांटने की तैयारी में हैं। वन एवं श्रम मंत्री का कहना है कि कई लोगों को सर्दी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह कंबल श्रम विभाग पुलिस की सहायता से बांटेगा। लोगों से कहा जाएगा कि कंबलों का एकदम उपयोग न करें। पहले उन्हें दो दिन तक धूप में सुखा लें या सुरक्षित स्थान पर रख लें।
लॉकडाउन के दौरान लोगों को छत उपलब्ध कराने के लिए जिले में 89 शेल्टर होम बनाए जाएंगे। इनमें करीब सोशल डिस्टेंस रखते हुए 5400 लोग रह\ सकेंगे। वहीं रविवार तक 8567 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया है। कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन के दौरान जिलेभर में पुलिस ने बिना छत वाले लोगों और भोजन पाने वालों की अलग-अलग सूची बनाई हैं।
ऐसे लोगों को शेल्टर होम उपलब्ध कराने के लिए स्कूल, धर्मशाला और आश्रमों की सूची तैयार की थी। डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने रविवार को कंट्रोल रूम के प्रभारी एसपी लोकजीत सिंह के साथ शेल्टर होम की सूची फाइनल की। डीआईजी ने बताया कि जिले में 89 स्थान चिन्हित किए हैं, जिनमें स्कूल, डिग्री कॉलेज, धर्मशाला शामिल हैं। इनमें करीब 5400 लोग रह सकेंगे। वहां पर लोगों को भोजन के अलावा चिकित्सा की सुविधाएं मिलेंगी। जल्द ही खुले आसमान में रहने वालों को यहां शिफ्ट किया जाएगा। उधर भोजन पाने वालों की सूची में लगातार इजाफा हो रहा हैं। इस कार्य में जागरूक लोग भी पुलिस की मदद कर रहे हैं।
कोरोना वायरस के संक्रमण के संदेह में होम क्वारंटीन किए गए लोगों ने अगर डॉक्टरों को सहयोग नहीं किया तो उनके खिलाफ आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। ऐसे लोगों में से ज्यादातर डॉक्टरों का फोन ही नहीं उठा रहे हैं। यदि कोई उठा भी रहा है तो ठीक से जानकारी नहीं दे रहा है।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें कोरोना वायरस के संदेह में होम क्वारंटीन किया गया था। ऐसे लोगों से डॉक्टर रूटीन में बात कर उनकी हालत जानना चाह रहे हैं। मसलन, उनके लक्षण कैसे हैं या उन्हें कोई और परेशानी तो नहीं हो रही है। मगर ऐसे लोगों को जब वीडियो कॉल या अन्य तरह से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है तो वो फोन रिसीव ही नहीं कर रहे हैं।
इस तरह की शिकायत प्रशासन से डॉक्टरों ने भी की है। जिलाधिकारी ने बताया कि यदि ऐसे लोगों की फिर से शिकायत आती है तो उनके खिलाफ उत्तराखंड एपिडेमिक डीजीज कोविड-19 रेग्यूलेशन-2020 एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उनके खिलाफ उत्तराखंड आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत भी मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। ऐसे लोगों से अपील है कि वे डॉक्टरों को सहयोग करें ताकि इस महामारी से लड़ने में सरकार का सहयोग हो सके।