प्रोफेसर रविकांत का कहना था कि कोरोना सिर्फ एक वायरस नहीं, विश्व पर आई एक बड़ी विपदा है। ये विपदा कितनी बड़ी हो सकती है, लोग इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। ऐसे में इस विपदा से लड़ने के लिए डॉक्टरों ही नहीं, मेडिकल से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को एक सैनिक की तरह मोर्चे पर डटना होगा। छात्रों की कक्षाओं को रद्द कर छुट्टियां घोषित किए जाने की मांग ठीक वैसी है, जैसे कोई सैनिक युद्ध के समय मोर्चा छोड़कर घर जाने की बात कहे।
एम्स प्रशासन और छात्रों के बीच बने गतिरोध को लेकर जब अमर उजाला ने एम्स प्रशासन का पक्ष जानना चाहा तो निदेशक प्रो. रविकांत ने खुलकर बातें स्पष्ट कीं। बकौल प्रो. रविकांत, कॉलेज में पढ़ने वाला प्रत्येक छात्र उनके अपने बच्चे की तरह है। वे कॉलेज कैंपस में पूरी तरह सुरक्षित हैं। बजाए इसके कि वे ऐसे समय में ट्रेवल करें, कहीं बाहर जाकर संक्रमित हो जाएं। हमने स्वास्थ्य युद्ध के इस मोर्चे पर उन्हें फ्रंट में नहीं रखा है।
वे सिर्फ हमारा बैकअप हैं। अगर प्रदेश में कोरोना के मामले बढ़ते हैं तो हम जानते हैं किस स्टूडेंट से क्या काम लेना है। बहुत से ऐसे काम होते हैं, जो मेडिकल स्टूडेंट ही कर सकते हैं या ट्रैंड स्टाफ। यहां पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 1500 से अधिक है। ऐसे में हम सिर्फ एमबीबीएस या नर्सिंग वालों को ही छुट्टि नहीं दे सकते। यदि छुट्टि दी तो सभी को घर भेजना पड़ेगा। एम्स खाली हो जाएगा।
एम्स में कोरोना से जंग में हाल-फिलहाल तो स्टूडेंट की जरूरत नहीं है। हालांकि हमारे पास 90 प्रतिशत स्टूडेंट और 10 प्रतिशत स्टाफ है। ऐसे में हम अपना बैकअप नहीं खोना चाहते। छात्रों को भी चाहिए कि वे अपनी जिम्मेदारी को समझें। हम उन्हें पूरे पांच साल पढ़ाकर कंपलीट डॉक्टर बनाना चाहते हैं। चार साल या साढ़े चार साल पढ़ाई वाले डॉक्टर को सोसायटी भी स्वीकार नहीं करेगी।
उन्होंने छात्रों से अपील की है कि संकट की इस घड़ी में एम्स का साथ दें। उनकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाएगा। उन्हें ऐसा कोई काम को नहीं सौंपा जाएगा, जहां उन्हें किसी तरह की दिक्कत हो सकती है। जहां तक रही कक्षाएं रद्द करने की मांग तो वे हॉस्टल में ही इलेक्ट्रानिक कक्षाएं शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। ताकि पढ़ाई भी बाधित न हो एम्स प्रशासन के पास बैकअप भी बना रहे।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते ओपीडी में आने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग शुरू हो गई है। इसके साथ ही मरीजों को कोरोना वायरस के प्रति जागरूक कर इससे बचने के उपाय बताए जा रहे हैं।
बृहस्पतिवार को एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत के निर्देश पर एम्स प्रशासन ने मरीजों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। इस दौरान 24 से अधिक चिकित्सकों की टीम ने अस्पताल की ओपीडी में परीक्षण के लिए आने वाले मरीजों की ओपीडी ब्लॉक में जांच की।
इस दौरान उनसे कोरोना वायरस के लक्षणों के मद्देनजर सवाल पूछे गए। प्रो. रवि कांत ने बताया कि कोरोना वायरस के विश्वव्यापी बढ़ते प्रकोप के चलते संस्थान में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की गाइड लाइन के तहत मरीजों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है।ृ इस अवसर पर डॉ. यूबी मिश्रा, डॉ. प्रसन कुमार पांडा, डॉ. मीनाक्षी धर. डॉ. योगेश, डॉ. अनुभा अग्रवाल, डॉ. सुलेखा आदि मौजूद थे।
एम्स में संदिग्ध मरीजों की संख्या छह
एम्स में कोरोना वायरस के संदिग्ध भर्ती मरीजों की संख्या छह है, बुधवार देर रात रुड़की निवासी 81 वर्षीय बुजुर्ग को एम्स के ट्रामा सेंटर के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। उक्त व्यक्ति गले में दर्द, नाक बहने व जुकाम की शिकायत से पीड़ित है, उसे लगातार 16 दिनों से ठंड लगने के साथ साथ बुखार की शिकायत बनी हुई है।
दवा लेने पर भी उसकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ, मरीज के अनुसार हाल में उसका बेटा थाइलैंड गया था और फिर बैंकॉक से दिल्ली होते हुए रुड़की आया, बैंकॉक व दिल्ली दोनों कोविड पॉजीटिव क्षेत्र है। संस्थान में किए गए सभी परीक्षण सामान्य पाए गए, मरीज का सैंपल लेकर परीक्षण के लिए प्रयोगशाला को भेज दिया गया है। भर्ती मरीजों में तीन की रिपोर्ट नेगेटिव आई है और तीन मरीजों की रिपोर्ट प्रयोगशाला से प्रतीक्षारत है।
ऋषिकेश एम्स में प्रतिदिन तीन हजार के करीब रोगियों का इलाज किया जाता है। सामान्य दिनों के लिए यहां स्टाफ पर्याप्त है। लेकिन एम्स प्रशासन इस बात को लेकर आशंकित है कि यदि कोरोना उत्तराखंड में महामारी का रूप लेती है, तब इससे कैसे निपटा जाए। ऐसे में मेडिकल छात्र ही एकमात्र बैकअप उनके पास मौजूद है।
वर्तमान में एम्स के पास 680 रेजीडेंट डॉक्टर, 1326 नर्सिंग स्टाफ मौजूद है। लेकिन महामारी की स्थिति में यह संख्या बहुत कम है। छात्रों की अगर हम बात करें तो इनकी संख्या 1500 से अधिक है। जो आपात स्थिति में बेहतर वालिंटियर हो सकते हैं। एम्स प्रशासन यही चाहते है कि छात्र नियमित पढ़ाई करते रहें, और आपात स्थिति के लिए तैयार रहें।
अगर महामारी फैली तो बैकअप में काम आएंगे छात्र
कोरोना को लेकर पूरे देश में एडवाइजरी जारी की गई है। उत्तराखंड सरकार ने भी समूह में लोगों को एकत्र होने से मना किया है। लेकिन एम्स में मेडिकल के छात्र ही इस नियम की अनदेखी कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को मेडिकल छात्र पूरे दिन समूह में रहे। धरना प्रदर्शन के दौरान अधिकतर छात्रों ने मास्क भी नहीं पहना था। इस तरह वे खुद नियमों की अनदेखी कर खुद को असुरक्षित कर रहे हैं।
हम घर जाना चाहते हैं...
एम्स प्रशासन छात्रों को स्वास्थ्य जंग लड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है, लेकिन ज्यादातर छात्र इस जंग से दूर ही रहना चाहते हैं। वे अपने घर लौटना चाहते हैं। उनका कहना है कि एम्स प्रशासन ने शीघ्र कोई फैसला नहीं लिया तो आने वाले दिनों में फ्लाइट, ट्रेनें इत्यादि भी बंद हो सकती हैं।
ऐसे में देशभर से आकर यहां मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र अपने-अपने ढंग से इस जुगत में जुटे हैं कि किसी तरह एम्स प्रशासन कक्षाएं रदृ कर दें और छुट्टियां घोषित हो जाएं। जबकि एम्स प्रशासन का कहना है, यहां किसी छात्र को कैद नहीं किया गया है। जो छात्र अपनी मर्जी से घर जाना चाहता है, वो जा सकता है।