ऑक्सीजन सिलिंडर, कंसंट्रेटर, फ्लोमीटर, बेड, एंबुलेंस समेत अन्य दवाओं और उपकरणों के नाम पर ये लोग जरूरतमंदों के साथ ठगी कर रहे हैं। इनके चंगुल में फंसकर जरूरतमंद लोग और परेशान हो रहे हैं। ।
वैक्सीनेशन ई-कार्ड क्यों है खास
- यह एक तरह का प्रोविजनल सर्टिफिकेट होता है, जोकि हर लाभार्थी को वैक्सीन के दोनों डोज लगने के बाद जारी किया जाता है।
- यह सीधे लाभार्थी के मोबाइल में कोविन एप के जरिए भेजा जाता।
- ई-कार्ड में लाभार्थी से जुड़ी जानकारी, जिसमें लाभार्थी का नाम, उम्र, कौन सा आईडी प्रूफ, पता, बेनिफिशरी रिफरेंस और आईडी होते हैं।
- सोशल मीडिया पर इन डिटेल्स की जानकारी देने वाले वैक्सीनेशन ई कार्ड को डालने से साइबर ठग इस जानकारी का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।
- आईडी से जुड़ी जानकारी के आधार पर खातों से रकम पार करने का खतरा भी बनता है।
- इसके अलावा आपकी पर्सनल डिटेल के किसी गलत जगह पर शेयर होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
कोई भी पर्सलन जानकारी सोशल मीडिया पर नहीं जाननी चाहिए। क्यूआर कोड में काफी जानकारी होती है। वहीं लोगों को किसी भी लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए।
- सुंदरम शर्मा, साइबर सेल प्रभारी, हरिद्वार