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कोरोना ने लोगों में जगा दी अपनी गाड़ी खरीदने की चाहत : ऑटोमोबाइल सेक्टर के विशेषज्ञ राकेश ओबेरॉय

Thu, 22 Oct 2020 12:04 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • फेस्टिवल सीजन से ऑटो इंडस्ट्री को मिलने लगी है ऑक्सीजन
  • कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री को नहीं मिल पा रही है रफ्तार
  • उद्यमी राकेश ओबरॉय ने की अमर उजाला से खास बातचीत
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राकेश ओबेरॉय - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पहले नोटबंदी का झटका लगा तो किसी तरह ऑटो इंडस्ट्री संभलने में कामयाब रही लेकिन इसके बाद कोरोना संक्रमण ने इस इंडस्ट्री को भी बीमार बना दिया। करीब छह महीने तक नए वाहन शोरूम में ही बंद रहे। अब अनलॉक शुरू होने के साथ ही फेस्टिवल सीजन में इस सेक्टर को भी ऑक्सीजन मिलने लगी है।

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दूसरी ओर कोरोना ने लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट से दूर होने में भी काफी प्रोत्साहित किया है, जिससे इस सेक्टर में नई जान आ रही है। सीआईआई के पूर्व अध्यक्ष और ऑटोमोबाइल सेक्टर के विशेषज्ञ राकेश ओबेरॉय ने इस इंडस्ट्री के विभिन्न पहलुओं पर अमर उजाला के साथ खास बातचीत की। पेश है उनसे बातचीत के अंश।

सवाल - अभी ऑटो इंडस्ट्री को आप कहां देख रहे हैं?
जवाब - पिछले तीन साल से ऑटो इंडस्ट्री काफी संघर्ष कर रही है। फिलहाल के सिनेरियो में बात करें तो ऑटो इंडस्ट्री का एक हिस्सा यानी कारों का बाजार काफी गुलजार है। दूसरा हिस्सा यानी कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री आज भी वैसी ही है। ओवरऑल इंडस्ट्री की बात करें तो अभी और सुधार की दरकार है।
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सवाल - पिछले कुछ वर्षों में ऑटो इंडस्ट्री किस तरह के परिवर्तनों से गुजरी है?
जवाब - पहले नोटबंदी आई तो सभी सेक्टर की तरह ऑटो इंडस्ट्री को भी झटका लगा था। हालांकि कुछ दिनों बाद राहत मिलनी शुरू हो गई थी। इसके बाद कोराना लॉकडाउन लगा तो इस इंडस्ट्री का भी लॉकडाउन ही हो गया। अनलॉक शुरू होने के बाद भी शुरुआत में तो राहत नहीं मिली लेकिन जैसे ही फेस्टिवल सीजन आया तो कुछ राहत मिलनी शुरू हुई। अब ऑटो इंडस्ट्री में काफी अच्छा उत्साह देखने को मिल रहा है, जो कि अच्छा संकेत है।

सवाल - क्या कोरोना का कुछ सकारात्मक असर भी ऑटो इंडस्ट्री पर मानते हैं?
जवाब - कोरोना महामारी है लेकिन एक सूरत में देखें तो लोगों की पब्लिक ट्रांसपोर्ट से दूरी ऑटो इंडस्ट्री के लिए सकारात्मक रुख लेकर आई है। लोग अब कम कीमत की छोटी कारें खरीद रहे हैं। उन्हें लगता है कि अपने वाहन में सुरक्षित हैं। इस इंडस्ट्री के लिए यह भी राहत की बात है।

सवाल - सरकार के स्तर से ऑटो इंडस्ट्री को लेकर कुछ राहत प्रदान की गई है?
जवाब - ऑटो में मार्केट जरूर खुला है लेकिन डीलर्स पर काफी बोझ है। इंटरेस्ट काफी हैवी है। सरकार ने आसान तरीके से लोन उपलब्ध कराने की बात तो कही है लेकिन लोन इसका सॉल्यूशन नहीं है। न केवल ऑटो इंडस्ट्री बल्कि सभी सेक्टर में कम से कम छह माह का ब्याज माफ किया जाना चाहिए। इसके बाद ही सरकार से असल राहत की बात मानी जा सकती है।

सवाल - पहाड़ में कोरोना लॉकडाउन के बाद से ऑटो सेक्टर के क्या हालात हैं?
जवाब - प्रदेश के पहाड़ी जिलों में अभी भी ऑटो सेक्टर बुरे दौर से गुजर रहा है। कारों की इक्का-दुक्की बिक्री जरूर हो रही है लेकिन कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री काफी निचले स्तर पर है। हालात यह हैं कि कई डीलर्स तो बहुत संघर्ष कर रहे हैं।

सवाल - ऑटो इंडस्ट्री की सुस्त रफ्तार की और क्या वजह मानते हैं?
जवाब - यूरो-6 के लिए तमाम पुर्जे विदेशों से आयात किए जाते हैं। इनकी उपलब्धता काफी कम हो गई है। इस वजह से न केवल कॉमर्शियल बल्कि सभी तरह के वाहनों का प्रोडक्शन प्रभावित हुआ है। 

सवाल - ऑटो इंडस्ट्री के भविष्य को किस तरह से मानते हैं?
जवाब - जिस तरह से हाल ही में सरकार ने लेबर लॉ सहित कई नियमों में बदलाव किया है, मैं मानता हूं कि आने वाले समय में इसका सकारात्मक असर हमारे देश की आर्थिकी पर भी पड़ेगा। आर्थिक हालात सुधरेंगे तो न केवल ऑटो बल्कि सभी सेक्टरों में ताजगी आएगी।

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