कोरोनेशन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर एनएस बिष्ट के मुताबिक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने को लेकर लोग जिंक युक्त गोलियों का बहुत अधिक सेवन कर रहे हैं जो सेहत के लिहाज से ठीक नहीं है। वैसे तो कैल्शियम और आयरन की तर्ज पर शरीर में जिंक की भी जरूरत होती है लेकिन इसके अत्यधिक सेवन से शरीर में अन्य खनिजों का अवशोषण प्रभावित होता है। ऐसे में टेस्टोस्टेरोन और अन्य हार्मोन असंतुलन हो जाता है। जिसके सकारात्मक की जगह नकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगते हैं। जिंक के अत्यधिक सेवन से बालों के झड़ने का खतरा बढ़ जाता है
संतुलित मात्रा में ही विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीनयुक्त भोजन लेने से ही फायदा
मैक्स अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के कंसलटेंट व वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. विनय सागर के मुताबिक कोरोना बीमारी के डर से लोग बहुत अधिक मात्रा में सुपर फूड, इम्यूनिटी बूस्टर लेने के साथ ही अपने आप विटामिन, प्रोटीन की गोलियां खा रहे हैं जो किसी भी सूरत में ठीक नहीं है। शरीर को संतुलित मात्रा में ही विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीनयुक्त भोजन की जरूरत होती है, ऐसे में यदि अनाप-शनाप तरीके से सुपरफूड और इम्यूनिटी बूस्टर का इस्तेमाल कर लिया जाए तो यह सेहत के लिए ठीक नहीं।
ताजे फल, हरी सब्जियां और दाल सबसे बढ़िया इम्यूनिटी बूस्टर
कोरोनेशन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एनएस बिष्ट के मुताबिक कोरोना संक्रमण से बचने या फिर कोरोना होने के बाद किसी भी तरह के सुपरफूड, इम्यूनिटी बूस्टर, बहुत अधिक काढ़े के सेवन करने की जरूरत नहीं है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि ताजे फल, हरी सब्जियां और दाल का इस्तेमाल करने के साथ ही घर में बनाया गया शुद्ध भोजन करें।
अति सक्रिय इम्यूनिटी से एलर्जी, मधुमेह, ऑटो इंफ्लेमेटरी का ख़तरा
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. रचित गर्ग के मुताबिक आजकल बाजारों में सुपर फूड, इम्यूनिटी बूस्टर का काफी ढोल पीटा जा रहा है। लेकिन अभी तक यह बात साबित नहीं हो पाई है कि ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को किस हद तक बढ़ाते हैं। दावा किया जा रहा है कि कुछ विटामिन एंटीऑक्सीडेंट्स, टैबलेट्स, सुपरफूड्स शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का काम करते हैं, लेकिन इसका कोई अभी वैज्ञानिक आधार नहीं है। अलबत्ता अति सक्रिय इम्यूनिटी के चलते एलर्जी, मधुमेह और समेत कई अन्य प्रकार के ऑटो इंफ्लेमेटरी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।