जापान से लौटे रुड़की आईआईटी के शोधार्थी को खांसी और गले में खरास होने की शिकायत पर सिविल अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने आईआईटी पहुंचकर मरीज का ब्लड सैंपल लिया। सैंपल को जांच के लिए दिल्ली भेज दिया गया है। सीएमएस ने बताया कि संदिग्ध मरीज को हरिद्वार स्थित कोरोना वार्ड में भर्ती कराया गया है। अगले 72 घंटे तक अस्पताल प्रबंधन उसे अपनी निगरानी में रखेगा।
रुड़की आईआईटी का एक शोधार्थी तीन मार्च को जापान से लौटा था। बीते शुक्रवार को इस शोधार्थी को खांसी और गले में खरास की शिकायत हुई। इसके बाद मरीज ने सिविल अस्पताल प्रबंधन को इसकी सूचना दी। सूचना के बाद सीएमएस डॉ. संजय कंसल, कोरोना वायरस निगरानी के नोडल अधिकारी डॉ. एके मिश्रा और अस्पताल प्रबंधक दिव्यांशु ने आईआईटी पहुंचकर मरीज की जांच की।
जांच करने पर टीम ने पाया कि मरीज को मामूली खांसी और गले में खरास की शिकायत थी, लेकिन मरीज विदेश से भी लौटा है इसलिए ऐहतियात मरीज का ब्लड सैंपल लेकर रिपोर्ट जांच के लिए भेज दी गई है। सीएमएस डॉ. संजय कंसल ने बताया कि संदिग्ध मरीज को हरिद्वार जिला के कोरोना वार्ड में भर्ती कराया गया है।
मरीज को 72 घंटे तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। सीएमएस ने बताया कि आईआईटी परिसर के ही तीन अन्य शोधार्थियों की जांच भी की गई। बताया कि हाल ही में अमेरिका से लौटे तीनों शोधार्थियों का मेडिकल चेकअप किया गया है। तीनों शोधार्थी पूरी तरह स्वस्थ हैं।
वहीं दूसरे देशों से प्रशिक्षण लेकर लौटे देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के 62 ट्रेनी आईएफएस अफसरों की डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम ने स्वास्थ्य जांच की। चार ट्रेनी अफसरों में खांसी जुकाम के लक्षण मिलने पर उन्हें कोरोना संदिग्ध मानकर सैंपल जांच के लिए हल्द्वानी भेज दिए गए हैं।
बृहस्पतिवार देर शाम और शुक्रवार को फीनलैंड, स्पेन और रूस आदि देशों से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के 62 ट्रेनी अफसर प्रशिक्षण लेकर देहरादून लौटे। बाहरी देशों से आने की वजह से संस्थान ने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी। सीएमओ डॉ. मीनाक्षी जोशी के निर्देश पर कोरोना के जिला नोडल अफसर डॉ. दिनेश चौहान डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की टीम के साथ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी पहुंचे।
डॉ. दिनेश चौहान ने बताया कि विदेश से लौटे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के 62 ट्रेनी अफसरों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग की गई। जिनमें से चार ट्रेनी आईएफएस अफसरों को कोरोना संदिग्ध मानते हुए सैंपल जांच के लिए डॉ. सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी जांच के लिए भेजा है।
मीट खाने से नहीं होता कोरोना संक्रमण
कोरोना संक्रमण की दहशत के बीच मीट और चिकन के कारोबार में भी मंदी की खबरें आ रही हैं। लोगों में यह बात भी फैल रही है कि मीट चिकन खाने से भी कोरोना का संक्रमण हो सकता है, जबकि डॉक्टर इस तरह के किसी तरह के वैज्ञानिक प्रमाण होने की बात से इंकार कर रहे हैं।
टर्नर रोड स्थित वेलमेड अस्पताल के वरिष्ठ सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक कुमार वर्मा ने बताया कि कोरोना संक्रमण सांस द्वारा फैलने वाला रोग है। इस बात का अभी तक कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि मीट चिकन खाने से कोरोना का संक्रमण फैलता है। कच्चा मांस खाने से जरूर दूसरी बीमारियां हो सकती हैं, लेकिन इससे कोरोना संक्रमण होने की बात किसी वैज्ञानिक अध्ययन में सामने नहीं आई है।