प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन की ओर से आयोजित दो दिवसीय प्रिंसिपल-शिक्षक राष्ट्रीय सम्मेलन में विद्यालयी शिक्षा की बेहतरी व कोरोना काल की चुनौती विषय पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि कोरोना काल विद्यालयी शिक्षा के लिए चुनौती के साथ ही अवसर भी लाया है। इस मुश्किल समय में स्कूल डिजिटल एजुकेशन से भी जुड़ सके। इसका भविष्य में लाभ मिलेगा, लेकिन हमें भौतिक कक्षाओं का महत्व कम नहीं होने देना है।
शुक्रवार को पहले सत्र में मुख्य वक्ता पद्मिनी साम्बाशिवम ने कोविड-19 के बाद छात्र व शिक्षकों के बीच तालमेल पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कक्षा ने अस्थायी समाधान के रूप में बेहतर विकल्प दिया, लेकिन इस दौरान छात्र व शिक्षकों के बीच तालमेल स्थापित करना बड़ी चुनौती रहा। डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से शिक्षा के क्षेत्र में बड़े सुधार किए जा सकते हैं। डॉ. गीता खन्ना ने बच्चों में स्वाभाविक स्थिति की पुनर्स्थापना, प्रो. हरीश चौधरी ने शिक्षकों द्वारा कार्यक्षमता व रोजगार प्रबंध का विकास, अशोक गांगुली ने लॉकडाउन और शिक्षा नीति, प्रज्ञा भारती ने संयुक्त शिक्षा विशिष्ट कार्य की कुंजी आदि विषयों पर विचार रखे।
एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने बताया कि सम्मेलन का मकसद शिक्षा की गुणवत्ता एवं पद्धति में सुधार लाना है। बताया कि शनिवार को शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक गणेश जोशी व सीबीएसई के सचिव अनुराग त्रिपाठी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम का संचालन पैसल वीड स्कूल के प्रिंसिपल जतिन सेठी ने किया।
इस दौरान वेल्हम ब्वॉयज की प्रिंसिपल संगीता, एशियन स्कूल की प्रिंसिपल रुचि प्रधान, डॉ. एससी बयाल (कैंब्रियल हॉल), कर्नल जसविंदर सिंह (समर वैली), अनिशा अरोरा, डीएस मान, एचएस मान, जनरल शमी सबरवाल, रिकेश ओबरॉय, बीपी उनियाल, सैमुअल, अतुल राठौर आदि उपस्थित रहे।