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सहकारी संघ के अध्यक्ष ने कैबिनेट मंत्री के बेटे-बहू पर लगाए गंभीर आरोप, जानिए पूरा मामला

Mon, 30 Oct 2017 11:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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भाजपा के इस कैबिनेट मंत्री के बेटे और बहु पर  राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह ने गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने मंत्री और पार्टी पर भी कई आरोप लगाए हैं।
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उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक से कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के बेटे और बहू ने नियमों को ताक पर रखकर 50-50 लाख रुपये का ऋण निकाला। मजेदार बात यह है कि जब यह ऋण निकाला गया तब प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार थी।

प्रमोद कुमार सिंह ने कहा नियमानुसार बैंक के अध्यक्ष और निदेशक न तो ऋण ले सकते हैं न ही अपने रिश्तेदारों को बैंक में नौकरी लगा सकते हैं। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह राज्य सहकारी संघ पर कब्जा करने की मंशा से सहकारी समितियों को समाप्त करने पर आमादा है।
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वह कांग्रेस भवन में मीडियाकर्मियों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने सहकारी बैंक से उन निदेशकों को नहीं हटाया जिन्होंने अपने रिश्तेदारों को नौकरी लगा रखा है। उन्होंने बताया कि नैनीताल सहकारी बैंक की निदेशक किरण नेगी के बेटे अमित सिंह नेगी बैंक में नौकरी कर रहे हैं।

उत्तरकाशी सहकारी बैंक की निदेशक बर्फी भक्ति के बेटे जितेंद्र भक्ति व दामाद प्रवीण कुमार को संविदा पर नौकरी दी गई है। नैनीताल सहकारी बैंक के निदेशक नवीन पंत ने सड़क को गिरवी रख कर बैंक से ऋण ले लिया।
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उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं राज्य सहकारी बैंक का अध्यक्ष रहते हुए कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के बेटे संजीव कुमार आर्य ने रिया होटल के प्रोपराइटर के तौर पर बैंक से 50 लाख रुपये का लोन प्राप्त किया।

बकौल प्रमोद कुमार, संजीव आर्य की पत्नी रेखा आर्य ने भी 50 लाख रुपये का ऋण लिया। जबकि नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि सहकारी बैंक का निदेशक या उसके रिश्तेदार को बैंक से न तो लोन मिल सकता है न ही नौकरी दी जा सकती है।

उन्होंने सवाल किया कि प्रदेश सरकार ने राज्य सहकारी बैंक के ऐसे निदेशकों को क्यों नहीं हटाया? उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह से सरकार ने तिकड़मबाजी से राज्य सहकारी बैंक पर कब्जा जमाया, उसी मंशा से वह राज्य सहकारी संघ पर कब्जा करना चाहती है।

दूसरी ओर, कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के बेटे और राज्य सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन संजीव आर्य का कहना है कि प्रमोद कुमार गलत आरोप लगा रहे हैं। सहकारी बैंक में ऐसा कोई नियम नहीं है कि चेयरमैन या निदेशक बैंक से लोन नहीं ले सकता है। उन्होंने सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही लोन लिया है।
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