2013 में आई आपदा के दौरान नुकसान उठाने वालों से सहकारी बैंक ब्याज की वसूली नहीं करेगा। सहकारी बैंक उनका ब्याज तो माफ करेगा ही साथ ही मूलधन की वसूली भी किस्तों में करेंगे। इस बात का एलान रविवार को प्रदेश के सहकारिता राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने किया।
उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ में कथित रूप से आत्महत्या करने वाले किसान के परिजनों से भी ब्याज की वसूली नहीं की जाएगी। इसके साथ ही ऐसे किसान परिवारों को भी रियायत देने की कोशिश की जाएगी, जिसके मुखिया की असमय मौत हो गई है। अगर ऐसे किसी किसान पर सहकारी बैंक का ऋण होगा तो उसके परिजनों से ब्याज की वसूली की जाएगी।
डॉ. रावत ने बताया कि केदारनाथ आपदा के दौरान लोगों को जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ा था। आपदा में जान गंवाने वाले कई लोगों पर सहकारिता बैंक का ऋण भी था। बैंक ऐसे लोगों के परिजनों से ब्याज की वसूली नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि कई लोगों ने सहकारिता बैंक से ऋण लेकर मकान और दुकान बनाया था, जो आपदा में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। ऐसे लोगों से भी ब्याज की वसूली नहीं होगी।
आपदा से प्रभावित कितने लोगों पर सहकारी बैंक का ऋण था इसका पता भी लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ जनपद में कुछ दिन पहले एक किसान ने आत्महत्या कर ली थी। किसान पर सहकारिता बैंक का कुछ ऋण था। बैंक किसान के परिजनों से ब्याज की वसूली नहीं करेगा।
उसके परिजनों को यह विकल्प भी दिया जाएगा कि वह अपनी सहूलियत के मुताबिक मूलधन की वापसी बैंक को कर दें। उन्होंने बताया कि असमय जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को भी ब्याज माफी की सुविधा दी जाएगी। इसकी अवधि क्या होगी, इसका एलान जल्द कर दिया जाएगा।