पति की मौत के 4 साल बाद पीड़ित महिला को अब इंसाफ मिला। लंबी जंग के बाद फोरम ने बीमा कंपनी को जुर्माने के साथ रकम लौटाने के आदेश दिए हैं। जानिए, पीड़िता के संघर्ष की कहानी...
मामला वर्ष 2013 के मई माह का है। शैलबाला जोशी निवासी शरणां-चांई, विशालखाल, पोखरी के पति प्रदीप जोशी की 22 मई 2013 कार दुर्घटना में मौत हो गई थी। कुछ समय बाद मृतक की पत्नी ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंश कंपनी से बीमा क्लेम मांगा लेकिन लंबे समय बाद भी कंपनी ने भुगतान नहीं किया।
शैलबाला ने बताया कि पति का बैंक खाता गोपेश्वर स्थित स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में था। बैंक ने प्रदीप का एसबीआई जनरल इंश्योरेंश कंपनी से बीमा करवाया था। इंश्योरेंश कंपनी की ओर से की गई बीमा पालिसी 25 फरवरी 2013 से 27 फरवरी 2014 तक के लिए वैध थी।
क्लेम करने के बाद भी बीमा कंपनी ने बीमा धनराशि का भुगतान नहीं किया। तब शैलबाला ने इस संबंध में उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई।
मामले में सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष व जिला न्यायाधीश प्रदीप पंत, फोरम के सदस्य क्रांति भट्ट व रैजा चौधरी ने फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को 30 दिनों में व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पालिसी की चार लाख रुपये धनराशि मृतक की पत्नी को देने के आदेश दिए। इसके साथ ही 25 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में शैलबाला को भुगतान करने के निर्देश भी दिए।