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गजब! 10 साल में भी नहीं आया 32 उपभोक्ताओं की शिकायतों पर फैसला, समय सीमा है 90 दिन

Sat, 15 Jun 2019 10:24 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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उत्तराखंड में उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े मामलों के निपटारे की समय सीमा तो महज 90 दिन निर्धारित है, बावजूद इसके प्रदेश में 32 केस ऐसे हैं जो 10 साल से फैसले का इंतजार कर रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले उपभोक्ता राज्य आयोग के हैं।

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इसके सापेक्ष जिला फोरमों की स्थिति ज्यादा बेहतर है। यहां बीते वर्ष 2018 में 110 फीसदी मामलों का निपटारा किया गया है। सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगी गई सूचना में उपभोक्ता राज्य आयोग ने लंबित केसों का कारण बार-बार हड़ताल होना और तारीख पर तारीख लेना बताया जा रहा है।

प्रदेश में उपभोक्ता मामलों के निपटारे से संबंधित यह सूचना आरटीआई कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने मांगी थी। इसमें पता चला कि जिला उपभोक्ता फोरम में वर्ष 2018 में 1185 केस पहुंचे थे।
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जबकि इस दरम्यान 1304 मामलों का निपटारा हुआ। इनमें कुछ मामले पिछले साल के भी लंबित थे। इन्हें मिलाकर यह लगभग 110 फीसदी है। साल के अंत में 3009 केस लंबित थे। उपभोक्ता राज्य आयोग में कुल 41 केस पहुंचे। 

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दस साल पुराने केस 

इनमें से निपटारा 24 का हो पाया। जबकि लंबित मामले 110 थे। इनके अलावा जिला फोरमों के फैसलों के विरुद्ध 251 अपीलें उपभोक्ता राज्य आयोग में आईं थीं। इस दरम्यान 229 अपीलों में ही फैसला हुआ। वर्ष के अंत में 886 अपीलें लंबित थीं। 

एक करोड़ रुपये से अधिक वाले-  02 केस
उपभोक्ता राज्य आयोग में अपील-  14 केस 
हरिद्वार जिला उपभोक्ता फोरम -    06 केस 
नैनीताल जिला उपभोक्ता फोरम-   03 केस 
पिथौरागढ़ जिला उपभोक्ता फोरम - 07 केस 
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