मायापुर चौकी पर तैनात एक सिपाही ने नेपाली मूल के यात्रियों को डरा धमका कर 56 हजार रुपये छीन लिए। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने इसमें दखलदांजी की तो सिपाही ने 21 हजार रुपये वापस कर दिए।
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एसएसपी ने सख्ती दिखाते हुए आरोपी सिपाही को निलंबित कर उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया है। देर रात उसकी गिरफ्तारी भी हो गई। नेपाल के सुरखेत निवासी प्रकाश बहादुर पुत्र शिव चंद्र और कमल पुत्र अमर बहादुर, नाथ और करण शिमला में सेब के बाग में काम करते हैं।
शुक्रवार को चारों एक साथ बस से नेपाल के लिए चले। रात को वे एक साथ हरिद्वार बस अड्डे पहुंचे और रुपड़िया जाने वाली बस का इंतजार करने लगे। बस अड्डे में पुलिस पिकेट में तैनात कांस्टेबल मनीष रावत उन्हें पुलिस बीट में ले गया। जहां उनके बैग की तलाशी ली गई।
बैग में ब्लेड मिलने पर कांस्टेबल चारों को मायापुर चौकी ले गया। जहां उनकी जेब से मिले 56 हजार रुपये सिपाही ने रख लिए। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट और अभद्रता की। पीड़ितों ने बस अड्डे पहुंचकर मामले की जानकारी परिवहन विभाग के अधिकारियों को दी।
परिवहन विभाग के अफसरों की दखल अदांजी के बाद सिपाही ने दो दोस्तों को पांच-पांच हजार रुपये देकर बस में बैठा दिया, जबकि प्रकाश और कमल यहीं रुक गए। शनिवार की सुबह प्रकाश और कमल बस अड्डे पर ही रोते रहे।
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने इस पर पुलिस के अधिकारियों से शिकायत की। इसकी जानकारी कांस्टेबल मनीष रावत को भी हो गई। कांस्टेबल कुछ ही मिनटों में प्रकाश और कमल के पास पहुंचा और 16 हजार रुपये देकर उन्हें भगाने लगा, लेकिन उन्होंने उसकी बात नहीं मानी।
कुछ ही मिनटों में एसएसपी खुद बस अड्डे पहुंच गए। उन्होंने वहां के सीसीटीवी की फुटेज देखी। जिसमें सिपाही चारों को अपने साथ ले जाता हुआ दिखाई दे रहा है। एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने संज्ञान लेते हुए कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है।
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एसएसपी ने बताया कि यात्रियों की शिकायत पर मायापुर चौकी में आरोपी कांस्टेबल मनीष रावत के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।देर रात उसकी गिरफ्तार भी हो गई।