उत्तराखंड में कांग्रेस के टिकटों की पहेली अभी पूरी तरह से नहीं सुलझ पाई है। प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय बेशक कहें कि 63 सीटों पर सहमति बन गई, मगर दावेदारों में मची होड़ जाहिर कर रही है कि अंदरखाते टिकटों को लेकर भीषण घमासान छिड़ा है।
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यही नहीं गठबंधन सहयोगी पीडीएफ की चुनावी भूमिका तय करने के चक्कर में पार्टी के एक विधायक और दो पूर्व प्रत्याशियों को सीट बदलने या मैदान से हटने का दबाव बनाया जा रहा है। कुमारी शैलजा वाली स्क्रीनिंग कमेटी की अब तक हुई बैठकों का यही निष्कर्ष निकल कर सामने आया है। लेकिन अंतिम निर्णय केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में होना है, जिसमें पार्टी प्रभारी, सीएम और पीसीसी अध्यक्ष अपने-अपने पैनलों की सूची रखेंगे। सूत्रों की मानें तो इन सूचियों में जो नाम कॉमन होंगे, उन पर रायशुमारी हो जाएगी लेकिन जिन नामों पर असहमतियां दिखेंगी उन पर निर्णय दिग्गजों के तर्कों से तय होगा।
बहरहाल, प्रदेश अध्यक्ष जिन सात सीटों पर असहमति का जिक्र कर रहे हैं, उनमें टिहरी, धनौल्टी, देवप्रयाग और झबरेड़ा, घनसाली, भीमताल और लालकुआं सीट है। धनौल्टी और भीमताल को छोड़कर बाकी सभी सीटें पीडीएफ के कब्जे वाली हैं। पीडीएफ के मंत्री प्रीतम पंवार यमुनोत्री कांग्रेस के लिए छोड़ने को तैयार हैं, बदले में वह धनौल्टी से वॉक ओवर चाहते हैं। लेकिन कांग्रेस उन पर दबाव बना रही है कि वह पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ें।
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पर प्रीतम निर्दलीय चुनाव लड़ना चाहते हैं। सूत्रों की मानें तो इस सीट पर बेहद करीबी अंतर से पिछला चुनाव हारे मनमोहन सिंह मल पर मसूरी से चुनाव लड़ने का दबाव बनाया जा रहा है। ऐसी ही जिद पर पीडीएफ के एक और मंत्री दिनेश धनै अड़े हैं। धनै टिहरी से चुनाव लड़ेंगे। उन पर सहमति बनने के बाद किशोर उपाध्याय को टिहरी छोड़कर ऋषिकेश से ताल ठोंकनी पड़ेगी। सूत्रों की मानें तो किशोर समर्थक इस सीट पर पिछले कुछ दिनों से खासे सक्रिय हैं। ऐसा होने पर इस सीट से तैयारी कर रहे पूर्व प्रत्याशी राजपाल सिंह खरोला को मायूस होना पड़ सकता है।
प्रत्याशियों के विद्रोही तेवरों से डरी हुई है पार्टी
मंत्री प्रसाद नैथानी
- फोटो : अमरउजाला
उधर, देवप्रयाग से मंत्री प्रसाद नैथानी, झबरेड़ा से हरिदास और लालकुआं से हरीश चंद्र दुर्गापाल कांग्रेस का उम्मीदवार बनने को तैयार हैं, मगर उनकी सीटों पर पूर्व प्रत्याशियों के विद्रोही तेवरों से पार्टी डरी हुई है। सूत्रों की मानें तो देवप्रयाग में पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण के लिए पार्टी नरेन्द्र नगर या डोईवाला में जगह बना रही है। डोईवाला में सिटिंग एमएलए हीरा बिष्ट को रायपुर सीट पर शिफ्ट हो जाने का दबाव बनाने की चर्चाएं हैं। कुछ ऐसे ही फार्मूले दूसरी सीटों के लिए भी तैयार किए जा रहे हैं।
टिकटों की ये पहेली सिर्फ सात सीटों पर ही नहीं उलझी है। टिकट की सबसे ज्यादा मारामारी कैंट और रायपुर सीट को लेकर है। दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में इन दोनों सीटों की दावेदारी का मुद्दा प्रमुखता से उठा। इन सीटों परकोई भी दावेदार पीछे हटने को तैयार नहीं। इस सीट पर सूर्यकांत धस्माना, पूर्व में चुनाव लड़े लालचंद शर्मा और सीएम के मीडिया प्रभारी राजीव जैन के नामों का पैनल बनाए जाने की चर्चा से दूसरे दावेदारों में जबर्दस्त उबाल है।
बाकी दावेदारों ने हाईकमान को पत्र भेजकर बाहरी को उम्मीदवार बनाये जाने का विरोध दर्ज किया है। रायपुर और सहसपुर सीट दावेदारों की लंबी फेहरिस्त के बावजूद भी पार्टी उलझन में हैं। सियासी संकट में पार्टी का साथ देने वाले भीमताल के बागी पूर्व विधायक दान सिंह भंडारी और घनसाली के पूर्व विधायक भीमलाल आर्य पर निर्णय होना है। भंडारी का पूर्व प्रत्याशी रहे राम सिंह केड़ा विरोध कर रहे हैं।
इन सीटों पर हैवीवेट उम्मीदवारों को उतारना चाहती है कांग्रेस
- फोटो : file photo
यही नहीं पार्टी से बगावत कर भाजपा में गए 10 पूर्व विधायकों की सीटों पर भी मजबूत दावेदारों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। ये सारी सीटें चूंकि कांग्रेस के कब्जे वाली रही हैं, इसलिए पार्टी इन सीटों पर हैवीवेट उम्मीदवारों को उतारना चाहती है।
माना जा रहा है कि इन सीटों पर वह भाजपा के पत्ते खुलने को इंतजार कर रही है। उसे इन सीटों पर भाजपा के भीतर बगावत की सुगबुगाहट सुनाई दे रही है, जिसे वह अपने पक्ष में भुनाना चाहती है।
चर्चा तो यहां तक है कि कांग्रेस की नजर बागियों के खिलाफ चुनाव लड़े भाजपा के उन पूर्व प्रत्याशियों पर भी है जो कम अंतर से हारे। ये पूर्व प्रत्याशी बागियों को लेकर खासे विचलित हैं।
प्रदेश अध्यक्ष का दावा सभी 70 सीटों पर एक साथ टिकट घोषित करने का दावा है, लेकिन ऐसा भी मुमकिन है कि पार्टी नरेन्द्रनगर, रायपुर, रूद्रप्रयाग, केदारनाथ, रूड़की, खानपुर, रामनगर, सितारगंज, जसपुर व सोमेश्वर सीट पर पत्ते भाजपा के नाम तय हो जाने के बाद खोले।