संजय गुप्ता-सीएम साहब और हमने शिलान्यास किया झील पर...झील के पैसे भी आ चुके हैं। इस चक्कर में गांव वाले भी नाराज हो गए कि सीएम साहब ने किसी को नहीं पूछा।
संजय गुप्ता-टिहरी में बड़ा स्कोप है। हम सीएम साहब से बात करा देंगे। टिहरी तो डेवलप होना ही होना है भाई साहब बोल ही रहे थे।
संजय गुप्ता-(सहस्त्रधारा रोड वाली जमीन के संबंध में) सीएम से मीटिंग कराने के बाद उसका निर्णय वो ही लें, हां ये है कि बात कटेगी नहीं।
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संजय गुप्ता-सीएम साहब इसी विधानसभा से हैं, तो तेजी से डेवलप कर रहे हैं और झील वाला उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है।
संजय गुप्ता-मैने कहा था कि आप सीएम बन गए तो यहां झील होनी चाहिए। उसके बाद सीएम बने, तो बिजी हो गए, लेकिन विधानसभा क्षेत्र है किठारना मंदिर है, वहां गए। मेरे को तो उम्मीद भी नहीं थी कि वहीं पर घोषणा कर दी इन्होंने कि झील बनाएंगे।
आयुष गौड-...मतलब उनके जेहन में पहले से ही थी ये बात।
संजय गुप्ता-उसका तो उन्हें करना भी था शिलान्यास, लेकिन हमने करवाया नहीं जानबूझकर। जिस दिन सीएम साहब ने किया, उसी दिन यहां की वैल्यू बीस लाख होगी...जिस दिन उन्होंने कर दिया मुहूर्त यहां घोषणा कर दी तो...
आयुष गौड़-अब हम लोग कहाँ...सीएम साहब वाली लैंड पर चल रहे हैं।
आयुष गौड़-वो भी ऐसे ही पहाड़ों पर है।
संजय गुप्ता-...नहीं नहीं वो ऐसा नहीं है।
आयुष गौड़-अच्छा उसमे आप मुझे लोकेट करके बता देंगे कहां पर बन रही है झील, तो पता लग जाएगा।
संजय गुप्ता-...नहीं नहीं, वो मैं बता दूंगा। निकाल के दिखा दूंगा में आपको सारी चीजें।
आयुष गौड़-कब तक हो जाएगा टेंडर भईया इसका।
संजय गुप्ता-इसका टेंडर हो जाएगा...हो गया होगा...अभी बात कर लूंगा रेंज में आने पर
आयुष गौड़-हमारी कंपनी को मिल सकता है कोई टेंडर आपके यहां जो इस तरह का हो।
संजय गुप्ता-टेंडर ऑलरेडी बोल रखा है मैने सीएम साहब को किसी अपने आदमी के लिए।
आयुष गौड़-इसका मतलब ऑलरेडी बुक है।
संजय गुप्ता-हां..ऑलरेडी बुक है। गाजियाबाद के कुछ लोग हैं।
आयुष गौड़-ऐसा है ना चार धाम वाली रोड जो आ रही है, उसके लिए बात कर लीजिए।
आज ज्यों ही कांग्रेस मुख्यालय में स्टिंग का प्रदर्शन किया गया, वहां मौजूद कुछ मीडियाकर्मियों के मुंह से अनायास ही निकल गया, क्या यही है वह व्यक्ति जो नजदीकी दिखाकर सीएम को ‘बेच’ रहा है। अमर उजाला ने हाल ही यह मामला उठाया था। जिस पर सरकार ने चुप्पी साध ली थी। दरअसल प्रदर्शित किए गए वीडियो में सूर्यधार प्रोजेक्ट पर बात कर रहे व्यक्ति और हाल ही वायरल हुए ऑडियो में सरकार को अपने इशारे पर चलाने का दावा कर रहे व्यक्ति की आवाज में काफी सामानता है।
वाकई दोनों एक ही आवाज हैं, यह तो फोरेंसिक जांच के बाद ही पता चलेगा, मगर कांग्रेस का दावा है कि यह सब सीएम के करीबी मित्र संजय का कारनामा है, जिसे दबाने के लिए स्टिंग करने वाले चैनल के सीईओ उमेश शर्मा को जेल भेज दिया गया था। क्या यह संजय गुप्ता की ही आवाज है, इस मुद्दे पर उनका पक्ष जानने के लिए, संपर्क की कोशिश की गई, मगर वे उपलब्ध नहीं हुए। इस मामले में संजय गुप्ता का जब भी जो भी पक्ष प्राप्त होगा, वह प्रकाशित किया जाएगा।
उमेश के स्टिंग से ‘जले’, उमेश के स्टिंग से ही ‘जला’ रहे
प्रेस कांफ्रेंस में एक अजीबोगरीब समीकरण नजर आ रहा था। जिस चैनल संचालक के स्टिंग के चलते एक समय में कांग्रेस को बेहद दुश्वारियां झेलनी पड़ी थी। तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ सीबीआई मुकदमा दर्ज हुआ, उसी चैनल संचालक के स्टिंग के हथियार से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और उपनेता प्रतिपक्ष करण महरा भाजपा सरकार के मुखिया पर वार पर वार किए जा रहे थे। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को भ्रष्ट ठहराने के लिए कांग्रेस के पास जो भी साक्ष्य थे, वो उमेश के निर्देश पर किए गए स्टिंग ही थे।