कांग्रेस को त्रिवेंद्र सरकार पर हमले का मौका मिल गया तो कांग्रेसियों ने प्रचंड बहुमत की सरकार को कमजोर बता डाला। कांग्रेसियों ने अपने तरकश के सारे तीर चलाने शुरू कर दिए। दमयंती प्रकरण पर विद्यालय शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय और श्रम मंत्री हरक सिंह रावत के आमने-सामने आने को कांग्रेसियों ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने दमयंती मामले में श्रम मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और विद्यालय शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के आमने-सामने आने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।
उन्होंने कहा कि मंत्रियों का खुलकर एक-दूसरे के सामने आना जाहिर करता है कि मुख्यमंत्री का अपने मंत्रियों पर कोई वश नहीं है वे मनमानी कर रहे हैं। उन्होंने तंज किया कि प्रचंड बहुमत होने के बावजूद त्रिवेंद्र सरकार मजबूत नहीं मजबूर है और ऐसा बार-बार सामने आया है।
मुख्यमंत्री केंद्र में अपनी ही पार्टी सरकार से जांच कराने में नाकाम
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उन्होंने कहा कि एनएच-74 के मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति कर चुकी है, लेकिन मुख्यमंत्री केंद्र में अपनी ही पार्टी सरकार से जांच कराने में नाकाम रहे हैं, जिससे सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हुआ है। दूसरा प्रकरण विशिष्ट बीटीसी का है, जिसमें केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने मुख्यमंत्री को मना कर दिया, जबकि कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत से हामी भर दी। तीसरा मामला लोकायुक्त का है, जिसके बारे में सीएम कहा कि इसकी जरूरत नहीं है, जबकि उन्हीं सरकार के मंत्री पंत ने बोला कि अगले सत्र में लोकायुक्त आएगा। कुल मिलाकर सरकार सक्षम फैसले लेने के बजाय आपस में ही उलझ रही है।
सरकार पर चंदा वसूली का आरोप
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने त्रिवेन्द्र सरकार पर विकास कार्य छोड़ चंदा वसूली करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सहित राज्य सरकार के सभी मंत्री व भाजपा विधायक आजीवन सहयोग निधि के नाम पर अधिकारियों, व्यापारियों, खनन तथा शराब कारोबार से जुडे़ लोगों से चंदा वसूली कर रहे हैं।