कांग्रेस बागी होकर भाजपा में शामिल हुए दिग्गजों के लिए विधानसभा टिकट आवंटित करने से पार्टी में बगावत की चिंगारी भड़क सकती है। पांच बागियों हरक सिंह, शैलारानी रावत, अमृता रावत, सुबोध उनियाल और प्रदीप बत्रा के टिकट पक्के होने पर घमासान मच सकता है।
बागी जहां से दावा कर रहे हैं वहां कुछ विधानसभाओं में सीटिंग विधायक पार्टी के हैं तो कुछ पर दमदार पुराने प्रत्याशियों की उपेक्षा भाजपा पर भारी पड़ सकती है। उधर, बागियों से भाजपा में पैदा हुई ऊहापोह की स्थिति का फायदा कांग्रेस उठाने की तैयारी में है। कांग्रेस ने बागियों की वापसी के लिए अपनी टिकट खिड़की खुली रखी है।
विधानसभा चुनाव में बागियों का फायदा लेना का भाजपा का दांव पार्टी को नए विवादों में घेर सकता है। बागियों के अपनी सीट से पलायन विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के सीटिंग विधायकों की धुकधुकी बढ़ा रहा है। बागी विधायकों में हरक सिंह रावत और अमृता रावत का अपनी सीट छोड़ नई विधानसभा से लड़ने की बात चल रही है।
हरक रुद्रप्रयाग से चुनाव लड़ने से इंकार कर चुके हैं। अब उनका लैंसडौन में बढ़ता रुझान वहां पर भाजपा विधायक दिलीप रावत के लिए परेशानी बनता जा रहा है। दिलीप का टिकट कटा तो भाजपा को कांग्रेस के साथ दिलीप समर्थकों का विरोध झेलना होगा। इसके अलावा यमकेश्वर विधानसभा सीट से भी हरक के लड़ने की चर्चा होती रही है, लेकिन वहां भाजपा विधायक विजया बड़थ्वाल आसानी से दावा नहीं छोड़ेंगी। अमृता रावत भी रामनगर के अलावा दूसरी विधानसभा तलाश रही है।
चौबट्टाखाल विधानसभा से उतरने के भी चर्चा होती रही, लेकिन वहां पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत का बड़ा कद आड़े आएगा। अमृता और हरक के अलावा प्रदीप बत्रा, सुबोध उनियाल और शैलारानी रावत की सीटों पर खासा घमासान मच गया है। प्रदीप को उनकी रुड़की सीट से भाजपा के पूर्व प्रत्याशी जगदीश जैन से चुनौती मिल रही है। नरेंद्र नगर से पूर्व विधायक सुबोध उनियाल को टिकट देने से वर्ष 2012 में भाजपा प्रत्याशी रहे ओम गोपाल रावत निर्दलीय टक्कर दे सकते हैं।
केदारनाथ में शैलारानी रावत का भाजपा में खासा विरोध हो रहा है। इसके अलावा अन्य बागियों की अपने विधानसभा क्षेत्र पर दावेदारी भाजपा को फायदा दिख रहा है। पूर्व सीएम विजय बहुगुणा खुद या बेटे सौरभ बहुगुणा को अपनी सीट सितारगंज से टिकट चाहते हैं। शैलेंद्र मोहन सिंघल जसपुर विधानसभा क्षेत्र से ही दावेदार हैं। सोमेश्वर से रेखा आर्य और कुंवर प्रणव का खानपुर और उमेश शर्मा का रायपुर सीट से दावा है। इनको लेकर भी वहां के स्थानीय भाजपा नेताओं का विरोध है, लेकिन उसको पार्टी झेलने की स्थिति में दिख रही है।
इसके अलावा अब तक पार्टी में किसी अहम जिम्मेदारी से वंचित सतपाल महाराज का इस्तेमाल पार्टी विधानसभा में करने की तैयारी में है। महाराज को बदरीनाथ से उतारे जाने का इशारा किया जा चुका है। बदरीनाथ में कांग्रेस के मंत्री राजेंद्र भंडारी की मजबूत पकड़ है, जिसकी काट पार्टी महाराज को मान रही है। महाराज के आने से चमोली जनपद की दो अन्य सीटों पर भी भाजपा को फायदा मिल सकता है। महाराज अगर बदरीनाथ आते हैं तो वहां दावा जता रहे नेताओं का झटका लगेगा।
भाजपा में बागियों के आने से पैदा होने सियासी स्थिति पर कांग्रेस नजर गाड़े हुए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने साफ कर दिया है कि बागी अगर वापस कांग्रेस में आना चाहते हैं तो उनके लिए हमारे दरवाजे खुले हैं। इससे पहले सीएम हरीश रावत और प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी भी बागियों की वापसी का इशारा कर चुकी हैं। हालांकि बागियों को लेकर तमाम तीखे बयान देने के बावजूद कांग्रेस के दरवाजे खोलने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पार्टी की नजर भाजपा के उन नेताओं पर भी है जो बागियों को टिकट देने पर अपना दावा गवां देंगे।