जोश, उत्साह और सक्रियता नहीं दिखती
जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के भीतर कई चेहरों ने पार्टी के अनुसांगिक संगठनों के जरिए परिवारवाद के इस कवच को तोड़कर सांगठनिक फोरम पर अपनी जगह बनाने की कोशिश की लेकिन वे नाकाम रहे। सत्ता से बाहर आठ साल के वनवास ने कांग्रेस नेताओं को पैदा करने वाली नर्सरी माने जाने वाली एनएसयूआई, युवा कांग्रेस सरीखे संगठनों को लुंज-पुंज बना दिया है। इन संगठनों में अब वैसा जोश, उत्साह और सक्रियता नहीं दिखती जो एक दशक पहले दिखाई देती थी। राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि जब तक कांग्रेस अपनी सांगठनिक ताकत जुटाएगी, तब तक चुनावी मोर्चों पर उसके भाग्य में सिर्फ संघर्ष ही लिखा होगा।
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कांग्रेस में नेताओं की कमी नहीं है। यह एक ऐसी पार्टी है जहां बड़े नेता से लेकर कार्यकर्ता तक सभी को एक समान महत्व दिया जाता है। भाजपा सरकार भी कांग्रेस में रहे नेताओं के सहारे चल रही है। भाजपा डरा धमका कर कांग्रेस नेताओं को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल करती है। लेकिन कांग्रेस में एक से बढ़ कर एक नेता हैं। -सूर्यकांत धस्माना, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष संगठन