उत्तराखंड में भाजपा के 64 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी होने के बाद कांग्रेस में भी हलचल बढ़ गई है। कांग्रेस की पूरी रणनीति इसी सूची के इर्द-गिर्द ही सिमटकर रह गई है। प्रत्याशी के चयन से लेकर प्रचार तक की रणनीति भाजपा की सूची के मुताबिक तय की जा रही है।
पार्टी का एक धड़ा भाजपा की तर्ज पर कुछ बड़े नेताओं को टिकट देने के बजाय प्रचार की कमान सौंपने की मांग कर रहा है। जबकि, टिकट वितरण के बाद बगावती तेवर अपनाने वाले भाजपाइयों पर भी कांग्रेस की नजर है। गढ़वाल मंडल की जिन सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं, पार्टी दोबारा उन्हीं पर दांव खेलेगी। बागी प्रत्याशियों वाली और पिछली बार हारी सीटों पर प्रत्याशी चुनना पार्टी के लिए मुश्किल होगा।
भाजपा ने सभी बागियों को टिकट दिया है। ऐसे में कांग्रेस को सबसे पहले उन सीटों पर विकल्प खोजना होगा। केदारनाथ, रुद्रप्रयाग, पुरोला, यमुनोत्री, देवप्रयाग, नरेंद्रनगर, टिहरी, धनोल्टी, सहसपुर, रायपुर, कैंट, मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार, बीएचईएल रानीपुर, ज्वालापुर, रुड़की, खानपुर, लक्सर, हरिद्वार ग्रामीण, यमकेश्वर, चौबट्टाखाल, लैंसडौन सीटों पर टिकट को लेकर पार्टी में जबरदस्त जोर आजमाइश चल रही है।
केवल पार्टी कार्यकर्ता ही नहीं अब भाजपा में टिकट पाने से चूके दावेदार भी कांग्रेस का अधिकृत प्रत्याशी बनने की कोशिशों में जुटे हैं। अब कांग्रेस नेतृत्व नए सिरे से प्रत्याशियों की समीक्षा में जुट गया है। बहुत संभव है कि कांग्रेस भी केवल प्रत्याशी के जीतने की संभावना के आधार पर ही उसे टिकट दे।
ऐसा हुआ तो कई भाजपा के असंतुष्टों की भी लॉटरी लग सकती है। बताया जा रहा है कि एक धड़े ने कुछ बड़े नामों को चुनाव मैदान में न उतारने की मांग की है। उनका तर्क है कि जैसे भाजपा ने प्रदेश के कुछ बड़े नेताओं को टिकट न देकर केवल प्रचार और चुनाव व्यवस्था पर लगाया है, उसी तरह कांग्रेस को भी करना चाहिए, ताकि चुनाव में उनका लाभ मिल सके।
दून में कहीं राहत तो कहीं आफत
राजधानी देहरादून में कांग्रेस पांच सीटों पर कंफर्टेबल कंडीशन में है। यहां अभी कांग्रेस के ही विधायक हैं। ऐसे में इन सीटों पर टिकट के लिए पार्टी को बहुत ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी पड़ेगी। सब कुछ सामान्य रहा तो पांचों सीटिंग विधायकों धर्मपुर से दिनेश अग्रवाल, राजपुर से राजकुमार, चकराता से प्रीतम सिंह, विकासनगर से नवप्रभात और डोईवाला से हीरा सिंह बिष्ट का टिकट तय माना जा रहा है।
इनमें से धर्मपुर, चकराता और विकासनगर सीटों पर अभी भाजपा ने भी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। दूसरी ओर, पांच अन्य सीटों कैंट, मसूरी, ऋषिकेश, रायपुर और सहसपुर में टिकट के दावेदारों की लंबी कतार है। पार्टी के लिए कैंट सीट सबसे हॉट बनी हुई है, जहां 21 दावेदार पहले ही टिकट की कतार में हैं। वहीं, कुछ अन्य दावेदार ऐसे भी बताए जा रहे हैं, जिन्होंने सीधे प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व में टिकट की अर्जी लगा रखी है।
भाजपा ने यहां से अपने सबसे अनुभवी विधायक हरबंश कपूर पर एक बार फिर दांव लगाया है। इसके बाद कांग्रेस में टिकट की लड़ाई दिलचस्प हो गई है। कांग्रेस चाहे किसी को भी टिकट दे, इस सीट पर बगावत स्वाभाविक है। रायपुर सीट पर उमेश शर्मा के भाजपा में जाने के बाद से कांग्रेसी दावेदार राहत महसूस कर रहे हैं। यहां से करीब एक दर्जन दावेदार टिकट मांग रहे हैं। मसूरी सीट पर पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला समेत करीब आधा दर्जन दावेदार कतार में हैं। ऋषिकेश सीट पर भी दावेदारों के बीच सिर फुटव्वल की स्थिति है। सहसपुर सीट पर भी कमोवेश यही स्थिति है।