यही नहीं पत्नी को ड्रग एडिक्ट बनाने और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए थे। शिकायतकर्ता का कहना था कि कई बार शिकायत करने के बाद भी उत्तराखंड के डीजीपी अनिल कुमार रतूडी किसी तरह की जांच नहीं करा रहे हैं। आयोग ने इस प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए कांग्रेस नेता धस्माना पर लगे आरोपों के साथ डीजीपी की भूमिका की भी जांच के आदेश दिए।
अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने बताया कि एसएसपी देहरादून को कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना पर लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच किसी महिला अधिकारी से कराने के आदेश दिए गए हैं। दून पुलिस शिकायकर्ता के आरोपों की पहले भी जांच कर चुकी है, लेकिन आरोपों में कोई दम नहीं मिला है।
पुलिस मुख्यालय के ई-मेल पर शिकायत प्राप्त हुई है, जिसमें कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना पर कतिपय आरोप लगाए गए हैं। अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार को आरोपों की जांच करने को लिखा गया था।
-अनिल कुमार रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक
कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का कहना है कि वह तो शिकायतकर्ता अथवा उनके परिवार के किसी सदस्य को जानते तक नहीं है। वह खुद हैरत में है कि उन पर इस तरह के आरोप किसके इशारे पर लगाए गए हैं। उन्होंने खुद डीजीपी से बात पूरे मामले की जांच कराने को कहा है, ताकि यह तो साफ हो सके कि इस साजिश के पीछे कौन है। वह तो हर जांच का सामने करने को तैयार है।
एक साल से फरार घोषित है शिकायतकर्ता
अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने बताया कि शिकायतकर्ता रेलवे विभाग से बर्खास्त है और उसके खिलाफ चार आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से एक मुकदमा शहर कोतवाली क्षेत्र का है। इस मामले में कोर्ट में पेश न होने के कारण 18 नवंबर 2017 को शिकायतकर्ता को फरार घोषित किया गया था, तब से पुलिस उसकी तलाश में है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली से मिले पत्र के आधार पर प्रमुख सचिव गृह को गंभीर आरोपों की जांच करने को लिखा गया है। पत्र में डीजीपी अनिल कुमार रतूडी और सूर्यकांत धस्माना को आरोपित करते हुए लिखा गया है कि राजनैतिक दबाव में अनिल रतूडी द्वारा शिकायतकर्ता की पत्नी और उनके बेटे की न्यायिक मेडिकल जांच नहीं करा रहे हैं। आरोपाें की जांच किस स्तर पर कराई जाएगी, इसका फैसला गृह विभाग को लेना है।
उषा नेगी, अध्यक्ष राज्य बाल संरक्षण आयोग