एसआईटी ने जब कॉलेज का भौतिक सत्यापन किया तो कॉलेज के स्थान पर खंडहर मिला। आरोपियों ने एमबीए, बीबीए, बीसीए, बीएससी, आईटी के कोर्स संचालित करने के लिए वर्ष 2011 में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से आवेदन किया था, लेकिन उन्हें मान्यता नहीं मिली थी।
एसआईटी ने मंगलवार को संदिग्ध आरोपियों को रोशनाबाद स्थित कार्यालय बुलाया। घोटाले से संबंधित सवालों का संतोषजनक जवाब न देने पर एसआईटी ने तीनों पदाधिकारियों को सिडकुल थाने के सुुपुर्द कर दिया।
आरोपियाें को आज बुधवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। वहीं, इस घोटाले में तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी और सहायक जिला समाज कल्याण अधिकारी की भूमिका की जांच की जा रही है।
कांग्रेस विधायक संस्था के उपाध्यक्ष
टेकवर्ड्स वली ग्रामोद्योग विकास संस्थान मंगलौर की प्रबंध समिति के पदाधिकारियों में कांग्रेसी विधायक काजी निजामुद्दीन का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। वह संस्था के उपाध्यक्ष बताए जा रहे हैं।
एसआईटी ने तीन पदाधिकारियों की गिरफ्तारी की है। इनमें मंगलौर के विधायक काजी निजामुउद्दीन का भाई और कोषाध्यक्ष काजी नूरुद्दीन के अलावा देवभूमि ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के चेयरमैन संजय बंसल भी शामिल हैं, वे टेकवर्ड्स वली ग्रामोद्योग विकास संस्थान में सचिव हैं।
-अशोक कुमार, पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था
हमारे पिता ने नूरुद्दीन के साथ पार्टनरशिप में वर्ष 2009 में कॉलेज खोला था। खुलने के बाद पार्टनर के साथ अनबन हो गई थी। लिहाजा, हम वर्ष 2010 में इस कॉलेज से अलग हो गए थे। हम इस कॉलेज में पार्टनर नहीं हैं। किसी भी तरह के छात्रवृत्ति घोटाले से हमारा कोई लेना-देना नहीं है।
-अमन बंसल, आरोपी संजय बंसल के पुत्र
मैं राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी निभा रहा हूं और मोदी के खिलाफ बोल रहा हूं, जिसका बदला मेरे भाई से लिया गया है। मेरे परिवार का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है।
- विधायक काजी निजामुद्दीन