मुकेश ने इस संबंध में बात की तो सचिन ने पीड़ित के साथ गाली गलौच कर दी। साथ ही रकम लौटाने से भी इनकार कर दिया। राजपुर पुलिस ने तब सचिन के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, गाली गलौच और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था।
पुलिस ने 10 दिसंबर 2017 को यह कहते हुए इस मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगा दी कि वादी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। इस पर मुकेश जोशी ने चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दायर की।
27 अप्रैल 2019 को एसीजेएम की अदालत ने अंतिम रिपोर्ट को निरस्त करने के आदेश दिए। इस बीच मुकेश के प्रार्थनापत्र पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी मामले में एसआईटी जांच के आदेश दिए। जिस पर थानाध्यक्ष राजपुर और रायपुर थाने के एक दरोगा को भी एसआईटी में शामिल किया।
जांच में सचिन उपाध्याय के खिलाफ पर्याप्त सुबूत मिलने पर पुलिस ने कुछ दिन पहले न्यायालय से उसके गैर जमानती वारंट हासिल किए। राजपुर थानाध्यक्ष अशोक राठौड़ ने बताया कि रविवार को पुलिस ने सचिन उपाध्याय को गांव चालंग स्थित उसके घर के बाहर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।