Iलोकसभा व विधानसभा चुनाव में लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस अपनी जीती व हारी हुई विधानसभा सीटों पर चुनावी रणनीति तय नहीं कर पाई है। 2022 के चुनाव व उसके बाद उपचुनाव में जीती सीटों पर आगामी चुनाव के लिए क्या करना है, इसे लेकर भी कांग्रेस असमंजस में है। जबकि भाजपा ने हारी 23 सीटों पर किलेबंदी शुरू कर दी है। 70 सीटों में से वर्तमान में कांग्रेस के कब्जे में 20 सीटें हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में बदरीनाथ व मंगलौर विस सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की। अब कांग्रेस ने जनता के भरोसे 2027 के चुनाव में सत्ता में वापसी की उम्मीदें लगाई है। लेकिन कांग्रेस की चुनावी रणनीति की तुलना भाजपा से की जाए तो वह अभी पीछे हैं। कांग्रेस यह तय नहीं कर पाई की जीती व हारी सीटों पर क्या रणनीति रहेगी। वर्तमान में जिन सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं, क्या 2027 में भी उन्हें उसी सीट पर टिकट दिया जाएगा, भाजपा की ओर से कांग्रेस की जीती सीटों पर सेंधमारी का किस तरह मुकाबला किया जाएगा, इसे लेकर असमंजस बना है। हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कोर कमेटी की बैठक में हारी सीटों पर जीत का मंत्र दिया। उनके इस मंत्र पर प्रदेश भाजपा ने काेर कमेटी के साथ ही विधायकों, सांसदों को हारी सीटों पर जिम्मेदारी सौंप कर हर बूथ तक पहुंचने की रणनीति बनाई है। जिन सीटों पर पिछले कई चुनाव से कांग्रेस चुनाव जीत रही है, उन सीटों पर कांग्रेस की जीत का क्या कारण है, उसके हिसाब से भाजपा चुनाव में उतरेगी।I
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Iचुनाव में जीत के लिए हर राजनीतिक दल का तंत्र काम करता है लेकिन हारी सीटों को लेकर भाजपा का एक मनोवैज्ञानिक शिगूफा है। क्या भाजपा के पास इस बात की गारंटी है कि जिन सीटों पर वह जीती है, उन सीटों पर दोबारा जीत मिलेगी। कांग्रेस पार्टी में कौन कहां से चुनाव लड़ेगा तय नहीं है लेकिन आमतौर यही देखा जाता है जीते विधायक को उसी सीट से मौका मिलता है। कांग्रेस आगामी चुनाव में जीतने की क्षमता रखने वाले को मौका देगी।
-गणेश गोदियाल, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेसI