- सीएम बोले, विपक्ष ने सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय राजनीतिक स्वार्थ को प्राथमिकता दी
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकल्प के अनुसार संसद में यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः के भारतीय दर्शन को आत्मसात किया। संसद-विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को मंजूरी देने के लिए तीन बिल प्रस्तुत किए थे, लेकिन कांग्रेस और विपक्ष माताओं-बहनों के हक को देने में सबसे बड़ी बाधा बन गया।
मुख्यमंत्री धामी ने रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि जो नारी शक्ति वंदन को रोक रहे हैं, समय उन्हें अवश्य जवाब देगा। हम देश की नारी को विश्वास दिलाते हैं, उनका अधिकार अवश्य मिलेगा। हमारा विकल्प रहित संकल्प है और इस संकल्प को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते रहेंगे। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सबका साथ, सबका विकास के मूल मंत्र पर चलते हुए, आधी आबादी को उनका पूरा हक प्रदान करने का प्रयास किया ताकि मातृशक्ति विकसित भारत के निर्माण में अपनी पूरी क्षमता से योगदान दे सके। जिस तरह विधेयक के सदन में गिरने पर कांग्रेस समेत विपक्ष ने जश्न मनाया, उससे ऐसा लगा कि जैसे उन्होंने मातृशक्ति को हरा दिया हो। जबकि इतिहास साक्षी है कि मातृशक्ति कभी हारती नहीं है।
16 और 17 अप्रैल को संसद में हुई चर्चा केवल कुछ विधेयकों तक सीमित नहीं थी। यह देश की आधी आबादी को नीति-निर्माण में समान भागीदारी देने का एक महत्वपूर्ण अवसर था, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने इस ऐतिहासिक अवसर का भी विरोध किया। विपक्ष ने सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय राजनीतिक स्वार्थ को प्राथमिकता दी। देशहित से ऊपर दलगत सोच को रखा। इनका विरोध नीतिगत कम और राजनैतिक ज्यादा होता है।
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झूठे तर्क देकर फैलाई भ्रांति
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने झूठे तर्कों और भ्रम फैलाकर इस महत्वपूर्ण विषय को राजनीतिक विवाद का रूप देने का प्रयास किया। परिसीमन को लेकर विपक्ष ने जो आशंकाएं व्यक्त की गईं, वे तथ्यों पर आधारित नहीं है। प्रस्तावित व्यवस्था में सभी राज्यों के लिए समान अनुपात में सीटों की वृद्धि का प्रावधान था। इससे किसी भी राज्य, विशेषकर दक्षिण भारत के हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी स्पष्ट किया है कि परिसीमन से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा।
धर्म आधारित आरक्षण की मांग तुष्टिकरण की राजनीति को दर्शाती है
सीएम ने महिला अधिकारों के मुद्दों पर कांग्रेस का रिकॉर्ड भी खराब बताया। शाहबानो प्रकरण में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के विरुद्ध खड़ा होना और तीन तलाक समाप्त करने के प्रयासों का विरोध करना भी उसी मानसिकता को दर्शाता है। यही नहीं, कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय निर्णयों और विधेयकों का भी हमेशा विरोध किया है। समाजवादी पार्टी की धर्म आधारित आरक्षण की मांग तुष्टिकरण की राजनीति को दर्शाती है और यह संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है।
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आधी आबादी के साथ अन्याय के समान
सीएम धामी ने प्रदेश के परिपेक्ष्य में कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण सहित यहां के पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन में मातृ शक्ति का योगदान अतुलनीय है। पूरे तंत्र को चलाने में वो धुरी की तरह हैं। अगर यह संविधान संशोधन विधेयक पारित हो जाता तो मातृ शक्ति को राजनीतिक रूप से सशक्त और नीति निर्माण में उनकी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित होती। ऐसे समय में उनके संवैधानिक अधिकारों को टालना केवल विधायी देरी नहीं, बल्कि सामाजिक प्रगति में बाधा उत्पन्न करना है। यह देश की आधी आबादी के साथ अन्याय के समान है और इसका व्यापक प्रभाव लोकतांत्रिक ढांचे पर पड़ता है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भारतीय जनता पार्टी महिलाओं के सशक्तिकरण और संतुलित प्रतिनिधित्व के लिए पूरी रूप से प्रतिबद्ध है। इस दौरान भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट, विधायक सविता कपूर आदि मौजूद थे।