प्रख्यात पत्रकार हिंदी ब्लिट्ज के पूर्व संपादक नंद किशोर नौटियाल का निधन हो गया। वे मुंबई में अपने बेटे पास रहे लेकिन अंतिम सांस उन्होंने देहरादून में अपने छोटे बेटे के पास ली। वे लंबे समय से बीमार थे। उनके निधन से मीडिया व समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों के बीच शोक की लहर है।
15 जून, 1931 को पौड़ी के एक छोटे से गांव में जन्मे नौटियाल को धारदार पत्रकार के साथ ही हिंदी भाषा आंदोलन के एक सक्रिय कार्यकर्ता के तौर पर देखा जाता था। साठ दशक की अपने पत्रकारिता मिशन के दौरान सामाजिक सरोकारों से निरंतर जुड़े रहे। उन्होंने उत्तराखंड आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वे महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी और बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष भी रहे।उनके निधन पर कई महानुभावों ने शोक प्रकट किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नौटियाल के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की। उन्होंने कहा कि नंदकिशोर नौटियाल एक समर्पित पत्रकार थे, जिन्होंने सदैव पत्रकारिता के उच्च मूल्यों को बनाए रखा। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने शोक संदेश में कहा कि उत्तराखंड के यशस्वी पुत्र, देश के वरिष्ठ पत्रकार नंदकिशोर नौटियाल का निधन हम सबके लिए एक गहरा आघात है। उन्होंने एक पत्रकार, एक निर्भीक सामाजिक कार्यकर्ता, प्रशासक व एक संगठनकर्ता के रूप में नए आयाम स्थापित किए। मैं उनको अपने श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, कांग्रेस के मुख्य प्रचार समन्वयक धीरेंद्र प्रताप ने भी नौटियाल के निधन पर शोक संवेदनाएं व्यक्त की।