चुनावी मौसम गरम है। वोट के लिए नेता बड़े-बड़े दावे ठोक रहे हैं। मगर किसी की नजर शहर के बदहाल रेलवे स्टेशन पर नहीं पड़ रही है। यही वजह है कि सत्ता के स्टेशन (राजधानी) पर जनता की रेलवे बेपटरी है।
रेलवे स्टेशन को हर्रावाला शिफ्ट करने की बात हो, प्लेटफार्म विस्तार या फिर दून से सहारनपुर के लिए वाया विकासनगर रेलवे लाइन। किसी भी मुद्दे पर कोई मुंह नहीं खोल रहा।
ऐसे हालात तब हैं, जब सहारनपुर लाइन का शिलान्यास वर्ष 1996 में तत्कालीन रेल राज्य मंत्री सतपाल महाराज के हाथों हो चुका है।
प्लेटफॉर्म बढ़े तब तो बढ़ें कोच
दून रेलवे स्टेशन के विस्तार का मसला वर्षों से लटका है। चार साल पहले नॉर्दर्न रेलवे महाप्रबंधक ने दून आकर विस्तार को मंजूरी दी थी।
प्लेटफार्म की क्षमता 18 कोच की होनी थी। मगर अफसरों की लापरवाही और बजट न मिलने से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। दून स्टेशन पर केवल 13 कोच वाली ही ट्रेनें पहुंच पाती हैं।
रिजर्वेशन काउंटर पर परेशानी
यात्रियों की मुसीबत रिजर्वेशन काउंटर से शुरू हो जाती है। काउंटर संख्या कम होने से टिकट के लिए यात्रियों को लंबी लाइन में जद्दोजहद करनी पड़ती है। स्टेशन पर दस रिजर्वेशन काउंटर में पांच ही काम कर रहे हैं। इनमें भी इंक्वायरी वाला अक्सर बंद रहता है।
स्टेशन पर रहता है बंदरों का आतंक
रेलवे स्टेशन पर बंदरों का डर रहता है। प्लेटफार्म तक पर बंदर उत्पात मचाते नजर आते हैं। हरिद्वार जाने वाले दैनिक यात्री खुड़बुड़ा निवासी विनोद शुक्ला ने बताया कि कई बार बंदर खाने-पीने की चीजों पर झपट पड़ते हैं। इस ओर रेलवे प्रबंधन ध्यान नहीं देता।
प्रवेश द्वार पर चेकिंग नहीं
यात्रियों की सुरक्षा पर भी लापरवाही साफ नजर आती है। प्लेटफार्म पहुंचने के लिए मुख्य प्रवेश द्वार पर चेकिंग नहीं होती। न प्रवेश द्वार पर मेटल डिटेक्टर काम कर रहा है। यह हालत तब है जबकि इधर इंडियन मुजाहिदीन के नाम से वेल्हम गर्ल्स स्कूल समेत विभिन्न स्थानों पर धमाके की धमकी मिली है।
नो पार्किंग के नीचे वाहनों की भीड़
स्टेशन पर पार्किंग अव्यवस्था से भी यात्रियों को दिक्कतों से जूझना पड़ता है। यूं तो रेलवे स्टेशन पर विभिन्न जगह नो पार्किंग जोन में वाहन खड़ा करने पर एक हजार जुर्माना के बोर्ड लगे हैं, मगर इन्हीं बोर्ड के नीचे लगी वाहनों की भीड़ व्यवस्था की खिल्ली उड़ती नजर आती है।
बेटिकट यात्री लगा रहे रेलवे को चूना
कर्मियों की लापरवाही से रेलवे को रोजाना हजारों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है। दरअसल, ट्रेन छूटते वक्त मुख्य गेट पर चेकिंग से बचने के लिए कई यात्री दूसरे रास्तों से बाहर चले जाते हैं। इनमें से अधिकतर बेटिकट होते हैं।
यार्ड पर उगी घास
रेलवे स्टेशन में यार्ड पर गंदगी का आलम है। यार्ड में कई महीनों से बड़ी-बड़ी घास उगी है। सफाई पर रेलवे बेपवाह है। यार्ड पर कभी भी कोई पानी खोल देता है। कोई प्लेटफार्म तक पहुंचने के लिए यार्ड के रास्ते पर दौड़-भाग शुरू कर देता है।
इनका है कहना
रिजर्वेशन के पांच काउंटर खुले रहते हैं। यात्रियों को ज्यादा दिक्कत नहीं है। पूर्व में कर्मचारियों की कमी की बात मुरादाबाद मंडल को भेजी गई थी। सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। अधिकारी समय-समय पर समीक्षा करते हैं।
-एसडी डोभाल, स्टेशन अधीक्षक