प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में संबोधित करते कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्य?
चिपको आंदोलन की वर्षगांठ पर वनाधिकार आंदोलन की ओर से आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई। साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। प्रेस क्लब में आयोजित विचार गोष्ठी में वन एवं पर्यावरण कानूनों के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
साथ ही वनों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार से कार्रवाई की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि चिपको आंदोलन के महत्व को भुलाया नहीं जा सकता। कहा कि स्थानीय लोग जब वन और वन्यजीवों का संरक्षण करते हैं तो उनका ही वनों पर अधिकार होना चाहिए। जो जनता अपनी आजीविका और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही थी, सरकार ने पर्यावरण कानूनों की आड़ लेकर, उसके ही जंगलों में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। रैणी के जंगलों की रक्षा के लिए गांव की महिलाओं ने ठेकेदार की कुल्हाड़ी और सरकार की बंदूक की भी प्रवाह नहीं की। सरकार ने उसी जंगल को नंदा देवी बायोस्फेयर के नाम से संरक्षित श्रेणी में रखकर, भोटिया समुदाय के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया।
वनाधिकार आंदोलन के संयोजक किशोर उपाध्याय ने कहा कि वे राज्य को वन प्रदेश घोषित करने और नागरिकों को वनवासी का दर्जा देने, वन अधिकार अधिनियम-2006 को पत्र और भावना में लागू किए जाने, प्राकृतिक संसाधनों पर प्रथागत और पारंपरिक अधिकारों की पुनर्स्थापना करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं।