आंदोलनकारियों का चिह्नीकरण पूरा करने, 15 हजार पेंशन पट्टा देने व हिमाचल की तर्ज पर सशक्त भू-कानून बनाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनकारी संयुक्त परिषद व विभिन्न सामाजिक संगठनों व राजनैतिक दलों ने सचिवालय कूच किया।
सचिवालय से पहले ही पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस में काफी तीखी नोकझोंक व धक्कमुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पर ही सभा आयोजित की और मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज राज्य को बने हुए लगभग 23 वर्ष होने को हैं। उत्तराखंड के लोग व आंदोलनकारी आज भी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कहा कि राज्य गठन के बाद कुछ मुट्ठी भर भू-माफिया शराब माफिया, नकल माफिया, खनन माफिया, आदि ने एक गिरोह बनाकर उत्तराखंड राज्य का बेहिसाब दोहन किया है। खनिज संसाधनों पर अपना कब्जा कर लिया है। कहा कि राष्ट्रीय दलों ने उत्तराखंड राज्य को मुख्यमंत्री की प्रयोगशाला बना रखा है।
ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने मांग की कि उत्तराखंड आंदोलनकारियों का चिह्नीकरण जल्द पूरा किया जाए और सभी आंदोलनकारियों को एक समान 15 हजार पेंशन दी जाए। उन्होंने हिमाचल की तर्ज पर धारा- 371 लागू करने, सशक्त भू-कानून जल्द बनाए जाने, यहां के मूल निवासियों को स्वरोजगार के लिए सरकार की ओर से प्रशिक्षित जाने, मूल निवास 1950 के आधार पर लागू करने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने वालों में उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद, उत्तराखंड महिला मंच जनवादी महिला समिति, नेताजी संघर्ष समिति, उत्तराखंड किसान सभा, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तराखंड कर्मचारी आंदोलनकारी संगठन आदि शामिल रहे। इस दौरान उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के संरक्षक नवनीत गुसाईं, प्रदेश अध्यक्ष विपुल नौटियाल, सुरेश कुमार, गणेश डंगवाल, अनुराग भट्ट, जगमोहन रावत, प्रभात डंडरियाल, एल रामपाल, निर्मला बिष्ट, मुन्नी खंडूड़ी आदि मौजूद रहे।