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ये डीएम जरा अलग किस्म के हैं...

Fri, 06 Sep 2013 09:51 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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प्रदेश में एक अधिकारी किसी की नहीं सुनते। इतना ही नहीं वह बगैर अनुमति के ही अपना ऑफिस छोड़ देते हैं। ये कोई ऐसे वैसे अधिकारी नहीं हैं।
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प्रदेश के ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी बीके संत की कार्यशैली के बारे में तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर आरके सुधांशु की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के कई बिंदु बेहद संवेदनशील हैं। इसमें कहा गया है कि डीएम बगैर अनुमति के ही मुख्यालय छोड़ते रहे हैं।

उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना
विगत 12 जुलाई को मुख्य सचिव को भेजी रिपोर्ट में सुधांशु ने लिखा कि उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना जिलाधिकारी संत की आदत बन गई है। एक तरफ जिले में दर्जनों गांव बाढ़ से घिरे हैं और गंभीर हालात पैदा होने की आशंका है, लेकिन डीएम किसी भी मामले में कड़ी कार्रवाई करने संबंधी पत्र भेजने के बाद ही जवाब देते हैं।
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उन्होंने लिखा कि राजस्व परिषद अध्यक्ष एसके मट्टू ने जिले में बाढ़ से निपटने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का आदेश दिया। जिस पर संत से तैयारियों के बारे में पूछा गया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया।

बगैर अनुमति मुख्यालय से बाहर गए
रिपोर्ट में कहा गया है कि गत 17 अप्रैल 2013 को निर्देश दिया गया था कि मंडलायुक्त की अनुमति के बगैर डीएम मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे।

इसके बाद भी पांच जुलाई को संत बगैर अनुमति मुख्यालय से बाहर गए। नौ जुलाई को डीएम ने समाज कल्याण और सूचना आयोग से संबंधित बैठक में भाग लेने के लिए देहरादून जाने की अनुमति मांगी।

पत्रावली का अवलोकन करने पर पाया कि इसमें डीएम का हिस्सा लेना जरूरी नहीं है। इसके लिए उन्हें निर्देशित भी किया गया था। इस मामले में डीएम बीके संत का फोन स्विच ऑफ होने की वजह से उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।

रिपोर्ट पर कुंडली मारकर बैठी सरकार
कमिश्नर की रिपोर्ट कार्रवाई करने के बजाय सरकार कुंडली मारकर बैठ गई है। मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने कहा कि कमिश्नर की रिपोर्ट तो मिली है। लेकिन उस पर क्या कार्रवाई होगी यह कार्मिक विभाग बताएगा।
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कार्मिक विभाग ने इस रिपोर्ट पर कुछ भी बोलने से परहेज किया। सूत्रों ने बताया कि मामला डीएम से जुड़ा है, ऐसे में कोई भी निर्णय मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव स्तर से ही लिया जाना है।

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