भाबर के जशोधरपुर और सिगड्डी इंडस्ट्रियल एरिया में कई फैक्ट्री मालिकों ने जीएसटी के बहाने करीब दो सौ से अधिक श्रमिकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
इनमें से कई फैक्ट्री वालों ने जहां स्थानीय पुलिस, प्रशासन और श्रम विभाग को पत्र लिखकर फैक्ट्री में ब्रेक की सूचना दी है, वहीं कई प्रतिष्ठानों ने इसकी सूचना तक देना जरूरी नहीं समझा। भाबर क्षेत्र के तीनों इंडस्ट्रियल एरिया में श्रम कानूनों का जमकर उल्लंघन हो रहा है। शासन, प्रशासन और श्रम विभाग की उदासीनता का लाभ उठाकर फैक्ट्री और कारखानों के प्रबंधक श्रमिकों का जमकर शोषण कर रहे हैं।
मनमानी का आलम यह है कि जीएसटी के लागू होने की बात करते हुए सिगड्डी सिडकुल की तीन कंपनियों ने कई श्रमिकों को बाहर का रास्ता दिखा गया है। एक फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से जहां जीएसटी लागू होने के बाद माल न मिलने की बात कही गई है, वहीं दूसरी ने लगातार घाटा बताते हुए श्रमिकों को एक महीने का वेतन देने का भरोसा देते हुए फैक्ट्री पर ताले लगा दिए हैं।
जशोधरपुर इंडस्ट्रियल एरिया के स्टील प्लांटों में भी श्रमिकों ने श्रम कानूनों का उल्लंघन होने का आरोप लगाया है। कहा कि 12 घंटे काम के बदले पेट भरने लायक ही पारिश्रमिक मिल पा रहा है। कई श्रमिकों ने श्रम मंत्री डा. हरक सिंह रावत को ज्ञापन सौंपकर स्टील प्लांटों में विषम परिस्थितियों में काम करने की शिकायत की है।
एसडीएम राकेश तिवारी ने कहा कि सिडकुल की एक फैक्ट्री में ब्रेकअप की सूचना मिली है। श्रम कानूनों के उल्लंघन के मामलों की जांच श्रम प्रवर्तन अधिकारी से कराई जाएगी।