उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने लखवाड़ जल विद्युत परियोजना के लिए केंद्र सरकार से बजट पारित कराने के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रयास नहीं करने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। आयोग ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को सलाह दी है कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मामले को प्रधानमंत्री के समक्ष भी रखें।
शुक्रवार को आयोग के अध्यक्ष सुभाष कुमार ने कहा कि जल संसाधन मंत्रालय ने 19 अप्रैल 2016 को लखवाड़ जल विद्युत परियोजना को निवेश अनुमति प्रदान की। इसके बावजूद परियोजना शुरू कराने की अगली प्रक्रिया पर सरकार और शासन ने कोई पहल नहीं की है।
आयोग का मानना है कि उत्तराखंड के ऊर्जा विभाग को स्वयं या मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री की ओर से भारत सरकार को अनुरोध पत्र लिखा जाना चाहिए था। आयोग अध्यक्ष ने मुख्य सचिव से यह भी अनुरोध किया है कि वे जल संसाधन मंत्रालय और केंद्रीय कैबिनेट सचिव के अलावा वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान प्रधानमंत्री के समक्ष भी इस मामले को रखें।
पांच राज्यों को मिलना है फायदा
यमुना नदी पर प्रस्तावित 300 मेगावाट क्षमता की यह बहुउद्देश्यीय परियोजना एक राष्ट्रीय परियोजना घोषित है। परियोजना का फायदा उत्तराखंड समेत पांच राज्यों को मिलना है। परियोजना से प्राप्त सिंचाई और पेयजल का लाभ दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को मिलेगा। इसमें सिंचाई व पेयजल उद्देश्य की लागत अनुदान के रूप में केंद्र सरकार की ओर से मिलनी है।