जौनसार-बावर के उद्पाल्टा गांव में मंगलवार को पारंपरिक पाइंता पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पश्चाताप और वियोग की लोक मान्यता से जुड़े इस पर्व पर रानी मुन्नी की घास और दूब से बनी प्रतीकात्मक प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इसके बाद उद्पाल्टा और कुरोली गांव के लोगों के बीच पारंपरिक गागली युद्ध हुआ। इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए आसपास के गांवों से हजारों लोग पहुंचे।
सुबह करीब 10:00 बजे उद्पाल्टा और कुरोली गांव के ग्रामीण अपने-अपने पंचायती आंगन में एकत्र हुए। ढोल-बाजों की थाप पर अष्टमी के दिन घरों में पूजी गईं रानी मुन्नी की प्रतिमाओं को लेकर ग्रामीणों ने नृत्य किया। करीब 11:00 बजे कुरोली के ग्रामीण नाचते-गाते उद्पाल्टा पहुंचे, जहां उनका स्वागत किया गया। दोनों गांवों के लोगों ने गले मिलकर पर्व की शुभकामनाएं दीं।
दोपहर करीब 1:00 बजे दोनों गांवों के ग्रामीण परंपरागत तरीके से क्याणी जंगल स्थित कुएं के पास पहुंचे। यहां रानी मुन्नी की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच गागली युद्ध शुरू हुआ। ग्रामीणों ने एक-दूसरे पर गागली के डंठल बरसाए। करीब आधे घंटे तक चले इस युद्ध में परंपरा के प्रति लोगों का उत्साह देखते ही बना। युद्ध समाप्त होने के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को गले लगाया और नाचते-गाते पंचायत आंगन पहुंचे। यहां देर शाम तक महिला-पुरुषों का सामूहिक नृत्य और लोकगीतों का दौर चलता रहा। इस मौके पर डॉ. गजेंद्र सिंह राय, जालम सिंह राय, पूरण सिंह राय, अनिल सिंह राय, मुल्तान सिंह राय, हरि सिंह राय, विक्रम सिंह राय, गुलाब सिंह, रणवीर सिंह राय सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।