दूल्हे बने भोलेनाथ जैसे भजनों के साथ धूमधाम से शिव-बारात निकली। सिर पर कलश लेकर चलती महिलाएं, टपकेश्वर महाराज के चार स्वरूप संग चलते भूतगण, भजनों पर झूमते श्रद्धालु। कुछ यही था बारात का नजारा।
शिव-बारात जहां से भी होकर गुजरी श्रद्धालु दर्शनों को उमड़ पड़े। रविवार को सुबह करीब साढ़े बारह बजे शिवाजी धर्मशाला से शिव-बारात की शुरुआत हुई। इससे पहले श्रद्धालु टपकेश्वर के चारों स्वरूपों को हरिद्वार गंगा जी से स्नान करा कर लाए।
विशेष श्रृंगार किया
धर्मशाला में भोले बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया। यात्रा में 18 झांकी और तीन बैंड शामिल किए गए थे। झांकियों में जगन्नाथ जी के तीन रथ, भूतेश्वर महादेव, देवेश्वर स्वरूप, ब्रह्मा, विष्णु, महेश और यमराज के स्वरूप आदि शामिल थे।
हाथ में गदा लिए हनुमान जी भोले बाबा की जय-जयकार करते हुए चल रहे थे। मथुरा के कलाकार भजन गाते और नाचते हुए संग थे। हर रथ से प्रसाद वितरण हो रहा था।
मंदिर प्रांगण पहुंच संपन्न
यात्रा सहारनपुर चौक, झंडा बाजार, धामावाला बाजार, पलटन बाजार, घंटाघर, चकराता रोड, बिंदाल पुल, डाकरा बाजार होते हुए गढ़ी कैंट स्थित टपकेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण पहुंच संपन्न हुई।
सेवादल के मनमोहन जायसवाल ने बताया कि इस बार आपदा की वजह से शिव-बारात का स्वरूप बेहद छोटा रखा गया है।
अशोक मिश्रा ने बताया कि दोपहर एक बजे से मंदिर में भंडारा शुरू हो गया था, जहां करीब दस हजार लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। शाम को मंदिर में बाबा की श्रृंगारमय आरती की गई।
साढ़े तीन घंटे देरी से झेलनी पड़ी दिक्कत
टपकेश्वर मंदिर की ओर से निकाली गई शिव-बारात पूरे साढ़े तीन घंटे देरी से निकली। इसके चलते लोगों को दिक्कत झेलनी पड़ी। समय सुबह नौ बजे का दिया गया था।
बारात की शुरुआत साढ़े बारह बजे हुई। जिन लोगों को भी समय की जानकारी थी वे सुबह वहां से नहीं निकले लेकिन जब दोपहर में उस रास्ते पर पहुंचे तो जाम ही झेलना पड़ा।
एक ही तरफ से निकाला ट्रैफिक
पुलिस ने यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए काफी प्रयास किया। सहारनपुर चौक की तरफ से आने वाली और पटेलनगर की तरफ से जाने वाली गाड़ियों को सड़क के एक ही ओर से निकाला जा रहा था ताकि दूसरी ओर यात्रा चल सके, ट्रैफिक जाम भी ना हो लेकिन ऐसा नहीं हो सका। शिव बारात के चलते कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ।