प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से पांच लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका है। वहीं, तीन लाख से अधिक बहनें लखपति दीदी बनने में सफल रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मातृशक्ति पहाड़ी मसालों से लेकर मंडुवा, झंगोरा, दालों, शहद, अचार, जैम, हस्तशिल्प, ऊनी उत्पादों और स्थानीय कला तक को व्यवसाय का रूप दे रही हैं।
राज्य उत्पादों में महसूस होनी चाहिए पहाड़ की मेहनत
सीएम धामी ने कहा प्रधानमंत्री मोदी ने वोकल फॉर लोकल, लोकल टू ग्लोबल और आत्मनिर्भर भारत जैसे मंत्र दिए हैं। प्रदेश सरकार इसे धरातल पर उतारने के लिए प्रयासरत है। सरकार चाहती है कि जब कोई व्यक्ति उत्तराखंड का उत्पाद खरीदे, तो उसे उत्पाद में पहाड़ की मेहनत, संस्कृति, परंपरा और मिट्टी की खुशबू भी महसूस हो। सरकार की ओर से प्रदेश में ग्रामीण हाट, विपणन केंद्र, कलेक्शन सेंटर और एग्री सर्विस सेंटर की व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। जिससे किसान व उद्यमी को अपने उत्पाद के लिए बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य मिल सके।
प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
मुख्यमंत्री ने योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने लखपति दीदी और महिला उद्यमियों को भी सम्मानित किया। इसके अलावा उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की पुस्तक व वार्षिक रिपोर्ट का भी विमोचन किया। एकीकृत कृषि कलस्टर आधारभूत प्रशिक्षण एवं मॉड्यूल और शिशु एवं लघु बाल आहार मॉड्यूल के साथ ही महिलाओं एचं बच्चों में एनीमिया की रोकथाम एवं प्रबंधन मॉडयूल का भी लोकार्पण किया।