मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि फाइलों को बेवजह लटकाए रखना या अपने दायित्व के प्रति अनजान बने रहना भी अनैतिक आचरण है। हम अपनी जिम्मेदारियों के प्रति न्याय करते हैं तो हम नैतिक हैं। वे सोमवार को राज्य सचिवालय में ‘लोकसेवा में नैतिकता’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में सचिवालय के लोकसेवकों को संबोधित कर रहे थे।
पिछले 18 सालों में पहली बार आयोजित इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में लोकसेवकों ने शिरकत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकसेवक उत्तराखंड के आवरण हैं। हम सभी से राज्य की पहचान होती है। कार्मिकों से उनके विभाग की पहचान भी स्थापित होती है। शासन व सरकार में शामिल लोगों के आचरण से सरकार की छवि बनती है। यदि अच्छी छवि है तो जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाता है। बुरी छवि होने से नकारात्मक संदेश जाता है। हम सभी चाहें सामान्य आदमी हों, कर्मचारी हों या बड़े अधिकारी हों, नियम कायदे सभी के लिए एक समान हैं।
सचिवालय बहुत महत्वपूर्ण संस्था है। यहां लिए जाने वाले निर्णय हजारों लाखों के जीवन पर प्रभाव डालते हैं। निर्णय लेने या फ ाइलों के निस्तारण में देरी की प्रवृत्ति से बचना चाहिए। हमारे राज्य का भला होगा तो हमारा स्वत: ही भला होगा। कार्यशाला को अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) ओम प्रकाश ने भी संबोधित किया। एसएसपी विजिलेंस सैंथिल अबुदई कृष्णराज एस ने सतर्कता अधिष्ठान की ओर से प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यशाला का संचालन अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने किया। कार्यशाला में शासन के प्रमुख सचिव, सचिव, अपर सचिव से लेकर अनुभाग अधिकारी स्तर के 300 से अधिक अधिकारी उपस्थित थे।
दूरदराज से आने वाले लोगों की अवश्य सुनवाई हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने कार्यों को लेकर प्रदेश के दूरदराज से आम लोग सचिवालय आते हैं। कुछ लोग फोन पर पूछताछ करते हैं। उनकी हमसे बहुत अपेक्षाएं हैं। उनकी सुनवाई होनी चाहिए। वे सचिवालय से अच्छे अनुभव लेकर लौटें। इससे सचिवालय और सरकार की छवि बनती है।
शासनादेश तुरंत अपलोड होने चाहिए
कार्यशाला में यह बात भी सामने आई कि विभागों के स्तर पर शासनादेश होते हैं। इन्हें एनआईसी की वेबसाइट पर तत्काल अपलोड होना चाहिए। खासतौर पर वित्त और कार्मिक व अन्य अहम विभागों के शासनादेशों को अपलोड करने में हीलाहवाली नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इनकी आवश्यकता अन्य विभागों को भी होती है।
जारी रहेगा कार्यशालाओं का सिलसिला
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकसेवा में नैतिकता की कार्यशाला की जो पहल हुई है, इसे जारी रखा जाएगा। अगले चरण में समीक्षा अधिकारी, सहायक समीक्षा अधिकारी, निजी सचिव संवर्ग के अधिकारियों के साथ कार्यशाला होगी। निदेशालय स्तर पर भी ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।
हमें कोई भी निर्णय लेते समय सही और गलत का ज्ञान होना जरूरी है। यदि निर्णय लेने में दुविधा है तो सबसे गरीब व्यक्ति का विचार करें, क्या हम अपने फैसले से उसके लिए कुछ अच्छा कर पा रहे हैं। राज्य ने हमें बहुत कुछ दिया है, हमें राज्य को इससे अधिक लौटाना है।
-उत्पल कुमार सिंह, मुख्य सचिव
हम अधिकारियों को अच्छा वेतन अन्य सुविधाएं मिलती हैं, जबकि एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जिसे अपनी सामान्य जरूरतों का पूरा करने के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ती है। इस मायने में हम भाग्यशाली हैं कि हमें यह अवसर मिला है कि आमजन के जीवन को सुधारने में सहयोग दें।
-अनिल कुमार रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक