उत्तराखंड मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरिहर आश्रम कनखल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत से मुलाकात की। वहीं बुधवार को रात करीब आठ बजे मोहन भागवत दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
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इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड में आने पर उनका स्वागत किया साथ ही कई अन्य बिंदुओं पर भी चर्चा की। मुलाकात के बाद पत्रकारों से वार्ता में सीएम रावत ने कहा कि उनकी मुलाकात सामान्य शिष्टाचार के तहत थी और इस दौरान सामान्य वार्ता ही हुई।
एक सवाल पर उन्होंने कहा कि इस दौरान कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई। क्या शांतिकुंज के प्रमुख डा. प्रणव पंड्या भाजपा से नाराज हैं और वे उन्हें मनाने आए हैं, इस सवाल पर सीएम ने कहा कि कोई किसी से नाराज नहीं है। सब कुछ ठीक चल रहा है। संतों की सदैव भाजपा के साथ सद्भावना रही है। सीएम के हरिद्वार पहुंचने पर भाजपा के जिलाध्यक्ष डा. जयपाल सिंह चौहान, ज्वालापुर के विधायक सुरेश राठौर, जिला महामंत्री विकास तिवारी, नरेश शर्मा, रोहित साहू, आशुतोष शर्मा, अनिरुद्ध भाटी, देवेंद्र मनवाल, कामिनी सड़ाना, विनोद चौहान, डा. विनोद आर्य, प्रेमशंकर पिंकी आदि ने उनका स्वागत किया।
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प्रमुख एजेंडा अगले साल इलाहाबाद में होने वाला कुंभ रहा
हरिद्वार में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
- फोटो : amar ujala
संतों की आचार्य सभा की बैठक में इलाहाबाद कुंभ को वैचारिक रूप से और ज्यादा समृद्ध बनाने पर चर्चा की गई। देश में दलितों तथा अन्य वर्गो के बीच बढ़ रही दूरी को बेहद गंभीर बताते हुए दलितों के बीच जाकर काम करने और उन्हें अपनेपन का एहसास कराने पर भी मंथन किया गया।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को हरिहर आश्रम में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर और आचार्य सभा अध्यक्ष स्वामी अवधेशानंद गिरि की अध्यक्षता में हुई बैठक में सामाजिक संरचना के बारे में चर्चा की गई। संतों का मानना था कि देश में जिस तरह से दलितों के उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी हैं और दलित समाज तथा अन्य वर्गो के बीच दूरी कम हो रही है। यह देश के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। बैठक में विचार रखा गया कि धर्माचार्य और उच्च वर्ग के प्रतिष्ठित लोग दलित समाज के बीच जाकर उनके साथ समय व्यतीत करें, सहभोज करें तथा उनके बच्चों को आश्रमों द्वारा संचालित विद्यालयों में शिक्षा प्रदान जाए।
बैठक में दलित उत्थान के लिए समय-समय पर योजनाएं बनाकर काम करने पर भी चर्चा की गई। बैठक में राम मंदिर का भी मुद्दा भी रखे जाने की चर्चा थी लेकिन आचार्य सभा ने इस मामले को न्यायालय में विचाराधीन बताकर फिलहाल चर्चा नहीं की। देश में शिक्षा का स्तर और ज्यादा बढ़ाने के लिए प्राथमिक स्तर के शिक्षकों को और ज्यादा प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया। आचार्य सभा ने तय किया कि शीघ्र ही प्राथमिक स्तर के 21 हजार से ज्यादा शिक्षकों का महासम्मेलन बुलाकर उन्हें सम्मानित किया जाएगा और शिक्षा में गुणवता बढ़ाने के बारे में भी प्रयास किए जाएंगे। बैठक का प्रमुख एजेंडा अगले साल इलाहाबाद में होने वाला कुंभ रहा।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भगवत सहित अन्य वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि कुंभ को और ज्यादा वैचारिक समृद्घ बनाया जाए ताकि देश विदेश तक भारतीय संस्कृति का और ज्यादा व्यापक प्रचार प्रसार किया जा सके। इस दौरान सभी आचार्यों ने अपने अपने सुझाव रखे।
निर्णय तो कोई नहीं लिया गया लेकिन कुंभ में संत सम्मेलन सहित अन्य अध्यात्मिक आयोजनों को और भी ज्यादा वैश्विक तथा आकर्षक बनाने पर विचार किया गया। हाल ही में संपन्न योग दिवस पर पूरी दुनिया में जिस तरह से भारतीय संस्कृति के अहम अंग योग का परचम लहराया इसे सभी वक्ताओं ने भारत की बढ़ती ख्याति के नजरिए से अति महत्वपूर्ण बताया।
बैठक में आचार्य सभा के अध्यक्ष स्वामी अवधेशानंद गिरि, महामंत्री स्वामी परमात्मानंद महाराज, शांति कुंज के अधिष्ठाता डा.प्रणव पंड्या भारत माता मंदिर के संस्थापक स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी, स्वामी दयानंद महाराज, पतंजलि योग पीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण, राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्र सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने बताया कि बैठक का कोई भी राजनीतिक एजेंडा नहीं था इसलिए राजनीति पर कोई चर्चा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि आचार्य सभा धर्माचार्यों के माध्यम से देश में सामाजिक समरसता की गतिविधयों को और बढ़ावा देगी।