एनएच-72 के चौड़ीकरण में हुए अरबों के घोटाले में राज्य सरकार का पक्ष स्पष्ट है और सोच-समझकर ही इसे सीबीआई जांच के लिए भेजा गया है। यह बात मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष कही।
उन्होंने कहा कि जांच कराइए इसके बाद सब कुछ खुलकर सामने आ आएगा। एनएच अफसरों ने इस घपले में लिप्त होने की बात से इंकार किया, जिस पर सीएम ने सीबीआई जांच में सबकुछ स्पष्ट होने का दावा किया। इसके अलावा हरिद्वार में रिंग रोड बनाए जाने की बात भी बैठक में तय हुई है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात का कार्यक्रम बुधवार की रात अचानक तय हुआ। जैसा कि माना जा रहा था कि बैठक में एनएच घोटाले की सीबीआई जांच को लेकर बातचीत होगी, मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राय देते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच में इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का होना पाया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ही इसकी सीबीआई जांच की सिफारिश की गई है। एनएचएआई अफसरों ने कहा कि उनका काम केवल मुआवजा बांटना है, ऐसे में उनके स्तर से कोई हेरफेर नहीं हुई है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि ऐसा है तो सीबीआई जांच में सबकुछ खुलकर सामने आ जाएगा।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से चारधाम रोड की मॉनिटरिंग सीधे अपने स्तर से करने का अनुरोध किया, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने उन्हें आश्वस्त करते हुए इसे निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2018 तक संपन्न करवाने की बात कही। इसके अतिरिक्त यह भी तय हुआ है कि हरिद्वार में जाम की समस्या को देखते हुए शहर से होकर गुजरने वाले ट्रैफिक को देहरादून या अन्य स्थानों की तरफ पास करने के लिए रिंग रोड का निर्माण किया जाएगा।
साथ ही हरिद्वार में एलिवेटेड रोड भी बनाई जाएंगी, जिससे ट्रैफिक सरलता से चल सके। वहीं राज्य की 22 सड़कों को नेशनल हाईवे में तब्दील करने पर भी सहमति बन गई है।