जनता दरबार में मुख्यमंत्री से विवाद को लेकर निलंबित अध्यापिका उत्तरा बहुगुणा के मामले में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय अपने वायदे से पलट गए।
न तो वे उत्तरा से मिलने गए और न ही खुद का वायदा तोड़ने की वजह का खुलासा किया। वायदे के अनुसार मंगलवार को शिक्षा मंत्री को अध्यापिका से मुलाकात करनी थी। उनके अचानक यू-टर्न लेने से सियासी हलकों में यह चर्चा गर्म रही कि शिक्षा मंत्री का अंदाज सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को नागवार गुजरा और इसे भांप वे पलटी मार गए। आज मीडिया ने पांडेय को उनका वायदा याद दिलाया तो वे ‘नो कमेंट’ कहकर निकल गए।
सीएम आवास की घटना मीडिया की सुर्खियां बनी तो शिक्षा मंत्री पांडेय ने शिक्षिका से खुद ही मुलाकात करने का वायदा कर डाला। उस रोज उन्होंने दूरभाष पर उत्तरा को ढांढस भी बंधाया। फिर बाकायदा एक प्रेस बयान जारी कर मीडिया को जानकारी दी थी कि वह मंगलवार को देहरादून पहुंचकर अध्यापिका से मुलाकात करेंगे। आज सुबह जब पांडेय सचिवालय पहुंचे तो मीडिया ने उनसे बात करने की कोशिश की। आमतौर पर वह मीडिया से खुलकर बात करने वाले पांडेय मंगलवार को सहज नहीं दिखे और सचिवालय में मीडिया से कन्नी काट गए।
जानकारों की मानें तो सोमवार रात सीएम कार्यालय की ओर से पांडेय को इस बात के संकेत दे दिए गए थे कि उत्तरा को लेकर उनकी यह पहल ठीक नहीं। आज जब पूरा मीडिया इंतजार कर रहा था कि वे 11 बजे उत्तरा से मुलाकात करने जाएंगे, इसके उलट वे अपराह्न तकरीबन तीन बजे तक सचिवालय में बैठकें करते रहे। बैठकों से फारिग होने के बाद जब मीडिया ने उनसे शिक्षिका से मुलाकात के वायदे के बारे में सवाल पूछा तो उनका एक ही जवाब था, ‘नो कमेंट’। इसके बाद सियासी हलकों में यह सवाल तैर गया कि आखिर पांडेय ने उत्तरा से मुलाकात के मामले में यूटर्न क्यों लिया? इस संबंध में ‘अमर उजाला’ ने उनका पक्ष जानने की बहुत कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात नहीं की।