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सीएम जनता दरबार केस: अपने ही वायदे से ‘पलटे’ शिक्षा मंत्री पांडेय, पूछने पर बोले ‘नो कमेंट’

Thu, 05 Jul 2018 09:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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arvind pandey
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जनता दरबार में मुख्यमंत्री से विवाद को लेकर निलंबित अध्यापिका उत्तरा बहुगुणा के मामले में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय अपने वायदे से पलट गए।

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न तो वे उत्तरा से मिलने गए और न ही खुद का वायदा तोड़ने की वजह का खुलासा किया। वायदे के अनुसार मंगलवार को शिक्षा मंत्री को अध्यापिका से मुलाकात करनी थी। उनके अचानक यू-टर्न लेने से सियासी हलकों में यह चर्चा गर्म रही कि शिक्षा मंत्री का अंदाज सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को नागवार गुजरा और इसे भांप वे पलटी मार गए। आज मीडिया ने पांडेय को उनका वायदा याद दिलाया तो वे ‘नो कमेंट’ कहकर निकल गए।  

सीएम आवास की घटना मीडिया की सुर्खियां बनी तो शिक्षा मंत्री पांडेय ने शिक्षिका से खुद ही मुलाकात करने का वायदा कर डाला। उस रोज उन्होंने दूरभाष पर उत्तरा को ढांढस भी बंधाया। फिर बाकायदा एक प्रेस बयान जारी कर मीडिया को जानकारी दी थी कि वह मंगलवार को देहरादून पहुंचकर अध्यापिका से मुलाकात करेंगे। आज सुबह जब पांडेय सचिवालय पहुंचे तो मीडिया ने उनसे बात करने की कोशिश की। आमतौर पर वह मीडिया से खुलकर बात करने वाले पांडेय मंगलवार को सहज नहीं दिखे और सचिवालय में मीडिया से कन्नी काट गए।
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जानकारों की मानें तो सोमवार रात सीएम कार्यालय की ओर से पांडेय को इस बात के संकेत दे दिए गए थे कि उत्तरा को लेकर उनकी यह पहल ठीक नहीं। आज जब पूरा मीडिया इंतजार कर रहा था कि वे 11 बजे उत्तरा से मुलाकात करने जाएंगे, इसके उलट वे अपराह्न तकरीबन तीन बजे तक सचिवालय में बैठकें करते रहे। बैठकों से फारिग होने के बाद जब मीडिया ने उनसे शिक्षिका से मुलाकात के वायदे के बारे में सवाल पूछा तो उनका एक ही जवाब था, ‘नो कमेंट’। इसके बाद सियासी हलकों में यह सवाल तैर गया कि आखिर पांडेय ने उत्तरा से मुलाकात के मामले में यूटर्न क्यों लिया? इस संबंध में ‘अमर उजाला’ ने उनका पक्ष जानने की बहुत कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात नहीं की। 
 

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दबाव में नहीं दिखना चाहती सरकार

arvind pendey
सियासी हलकों में यह चर्चा भी गरम है कि शिक्षिका उत्तरा बहुगुणा के मामले में प्रदेश सरकार यह संदेश नहीं देना चाहती कि वह दबाव में है। लेकिन ,वह यह संदेश भी नहीं जाने देना चाहती कि वह अध्यापिका को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रस्त है और उसको नुकसान पहुंचाना चाहती है। सूत्रों की मानें तो उत्तरा को देहरादून में पोस्टिंग नहीं दी जाएगी। ये संकेत उनसे मिले शिक्षा निदेशक आरके कुंवर पहले ही दे चुके हैं।

माना जा रहा है कि उत्तरा को सुगम में तैनाती देने से तबादला कानून का उल्लंघन होगा। इससे सरकार के पास ऐसे मामलों की बाढ़ आ जाएगी। मामला अदालती वाद में फंस सकता है। दूसरी वजह राजनीतिक मानी जा रही है। भाजपा से जुड़े सूत्रों की मानें तो उत्तरा मामले में हुई सियासत से सरकार को जितना नुकसान होना था, वह हो चुका है। अब आगे भी रक्षात्मक रुख अख्तियार करने से यह नुकसान और अधिक बढ़ सकता है। शायद सरकार के इसी रुख की वजह से शिक्षा मंत्री अपना वायदा नहीं निभा सके।

...और ये है मंत्री समर्थकों का तर्क 
उत्तरा से मुलाकात टालने के पीछे शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के समर्थक कुछ और ही तर्क दे रहे हैं। उनका कहना है कि मंत्री उत्तरा के मीडिया में दिए गए उस बयान से क्षुब्ध होकर उनसे मिलने नहीं गए, जिसमें उन्होंने यह कहा कि वह मंत्री के पास नहीं जाएंगी बल्कि मंत्री खुद उनके घर आकर बात करेंगे। 
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