मुख्यमंत्री हरीश रावत खटीमा विधानसभा क्षेत्र में रूठे कांग्रेसियों को मनाने के अभियान पर हैं। कभी ये कांग्रेसी मुख्यमंत्री के करीबी होते थे। लेकिन राजपाठ में रमे मुख्यमंत्री से उनके ये करीबी दूर होते चले गए। चुनाव आए तो इन करीबियों की उन्हें याद हो आई है। करीबी भी मानो मुखिया के संकेतों की राह देख रहे थे।
बहरहाल, सीएम ने अपने इन पुराने समर्थकों क्षेत्र की स्थिति जानने के बहाने देहरादून बुलाया है। माना जा रहा है कि इसी बहाने कार्यकर्ताओं के गिले-शिकवे भी दूर किए जाएंगे।
विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही खटीमा विधानसभा में मुख्यमंत्री हरीश रावत को पुराने कांग्रेसियों की याद सताने लगी है। ऐेसा अकारण नहीं है। रावत के पुराने करीबियों में माने जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी महेश जोशी मुख्यमंत्री के खटीमा में आयोजित दो कार्यक्रमों में मौजूद नहीं रहे।
जोशी के साथ ब्लॉक प्रमुख दान सिंह राणा, वरिष्ठ युवा कार्यकर्त्ता देवेंद्र कन्याल सहित पूर्व पीसीसी सदस्य एवं पूर्व मंडी चेयरमैन दलजीत गोराया भी दूरी बनाए हुए हैं। ऐसा नहीं है कि इन नेताओं की नाराजगी सिर्फ कार्यक्रमों से दूरी बनाकर रखने के रूप में ही सामने आई हो।
पहले भी नाराजगी जता चुके हैं राणा
ब्लॉक प्रमुख राणा ने खटीमा से शुरू हुई सतत विकास संकल्प यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री की पूर्व में की गई घोषणाओं के पूरा नहीं होने को लेकर भी नाराजगी जताई थी। कांग्रेस के इन वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने इस दौरान इन्हें सौंपे गए दायित्व वाले पदों को लेकर भी खास उत्साह नहीं दिखाया।
नब्बे के दशक में खटीमा जिला बनाओ एक्शन कमेटी के लगभग तीन माह तक चले आंदोलन के दौरान धरना स्थल पर पहुंचे हरीश रावत ने तब यह कहते हुए अनशन समाप्त कराया था कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार के बनते ही सबसे पहले खटीमा को जिला घोषित किया जाएगा। कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि आज तक खटीमा को जिला बनाना तो दूर, उसका नाम भी सूची में नहीं है।
इस स्थिति को देखते हुए अब मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नाराजगी जता रहे इन कांग्रेस नेताओं को मनाने की कोशिश भी शुरू की है। इन सबको मुख्यमंत्री हरीश रावत ने देहरादून बुलाया है। कहा जा रहा है कि इन नेताओं से चुनाव को लेकर बात की जाएगी।