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सीएम के दखल के बाद गाड़ी में लगी नंबर प्लेट

Wed, 30 Sep 2015 12:33 PM IST
चांद मोहम्मद/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में वाहनों पर नंबर प्लेट लगाने वाली प्राइवेट कंपनी वाहनों पर देरी से प्लेट लगाने में अक्सर सुर्खियों में रहती है।
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इस बार कंपनी की बड़ी लापरवाही सामने आई है। नंबर प्लेट के लिए शुल्क जमा करने के एक साल बाद भी नैनीताल में एक व्यक्ति की बाइक को नंबर प्लेट नही मिली। व्यवस्था से परेशान समाधान पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, तो मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया।

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी को पत्र जारी कर जवाब मांगा। जिस पर त्वरित कार्रवाई हुई। मुख्यमंत्री की दखल के बाद उस व्यक्ति को एक साल बाद नंबर प्लेट मिली।
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कंपनी की कारगुजारी से नाराज मुख्यमंत्री ने गुरुवार को समाधान की समीक्षा बैठक में परिवहन अफसरों को जमकर फटकार लगाई। कार्य सही ढंग से नहीं करने पर कंपनी को किसी प्रकार की रियायत नहीं देने की सख्त हिदायत दी।

ये है मामला
हल्द्वानी निवासी हरीशचंद्र पांडेय ने विगत 25 अगस्त-2014 को मोटर साइकिल (यूके 04 ई 6392) पर एचएसआरपी (हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट) लगवाने के लिए शुल्क जमा कराया था। आरोप है कि नंबर प्लेट लगाने वाली कंपनी लिंक उत्सव के कर्मचारी पांडेय को एक साल तक टरकाते रहे।

परेशान होकर पांडेय ने 14 अगस्त-2015 को अपनी शिकायत स्वराज भ्रष्टाचार उन्मूलन विभाग द्वारा संचालित समाधान पोर्टल पर कर दी। पोर्टल की मॉनीटरिंग स्वयं मुख्यमंत्री हरीश रावत कर रहे हैं। 20 अगस्त को मुख्यमंत्री कार्यालय से सहायक संभागीय अधिकारी नैनीताल को जवाब देने के लिए पत्र भेजा गया। मुख्यमंत्री का परवाना मिलने से कार्यालय में हड़कंप मच गया। 22 अगस्त को तत्काल नंबर प्लेट लगवा दी गई।

पूरे प्रदेश में यही हालात, लगी थी 76 लाख की पेनाल्टी
प्राइवेट कंपनी के पूरे प्रदेश में यही हाल है। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थिति और दयनीय है। विगत वर्ष ऐसे ही मामलों में जांच के बाद परिवहन आयुक्त ने कंपनी पर 76 लाख की पेनाल्टी लगाई थी। जिस पर कंपनी कोर्ट गई थी। फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
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समाधान पर शिकायत के संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय से पत्र मिला था। जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए बाइक पर नंबर प्लेट लगवा दी गई है। कंपनी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है। कंपनी द्वारा लेटलतीफी करने की सैकड़ों शिकायतें हैं, जिनकी मुख्यालय स्तर पर जांच चल रही है।
- संदीप वर्मा, एआरटीओ प्रशासन, नैनीताल
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