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सीएम रावत के हरिद्वार आने से बदलेंगे समीकरण

Mon, 23 Jan 2017 10:23 AM IST
राजेश शर्मा-कुणाल दरगन / अमर उजाला, हरिद्वार
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सीएम हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
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हरिद्वार ग्रामीण से उत्तराखंड मुख्यमंत्री हरीश रावत के चुनावी मैदान में उतरने से माना जा रहा है कि जिले की लगभग सभी सीटों पर राजनीतिक समीकरण बदल जाएंगे। कई सीटों पर कांग्रेस को अब ताकत मिलने की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में भाजपा को अब अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा।
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वैसे तो हरिद्वार ग्रामीण पर पिछले करीब दो सालों से सीएम हरीश रावत की नजर थी। पंचायत चुनाव में इसका रिहर्सल भी एक तरह से किया गया था। यहां एक साल से सीएम की बेटी अनुपमा रावत दावेदार के रूप में सक्रिय थीं, पर ऐन वक्त पर पार्टी ने जब परिवारवाद के मुद्दे पर भाजपा को घेरने की तैयारी की तो अनुपमा का टिकट कट गया। रविवार को सूची जारी होते ही इस पर मुहर भी लग गई।

हालांकि इस सीट पर सीएम ने खुद को प्रोजेक्ट करके एक तीर से दो निशाने साधे हैं। पहला उन दावेदारों को शांत कर दिया है जो अनुपमा या किसी और को टिकट मिलने पर पार्टी के लिए मुसीबत बन सकते थे। दूसरा आसपास की सीटों लक्सर, खानपुर, हरिद्वार नगर, ज्वालापुर और रानीपुर पर भी कांग्रेस ने लीड लेने का दांव खेला है। उधर सीएम के मास्टर स्ट्रोक से भाजपा और बसपा के नेता अब नए सिरे से अपने गणित जोड़ने में जुट गए हैं। 
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सीएम हरीश रावत कमजोर आत्मविश्वास के साथ यहां चुनाव लड़ने आ रहे हैं। उनमें आत्मविश्वास होता तो वे केवल हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव लड़ते। इससे साफ है कि उन्हें यहां अपनी हार दिख रही है। हरिद्वार ग्रामीण की जनता उनसे केंद्रीय मंत्री, सांसद और सीएम रहते हुए की गई क्षेत्र की उपेक्षा का हिसाब लेगी। हरीश रावत यहां अपनी जमानत भी नहीं बचा सकते। 
- स्वामी यतीश्वरानंद, भाजपा प्रत्याशी, हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा 

पांच साल तक तो हरीश रावत को हरिद्वार की याद नहीं आई। जब से उनकी पत्नी सांसद का चुनाव हारी है, तब से वे अपने आपको को हरिद्वार का हितैषी साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। एक बार वर्ष 2009 में जनता उनके झांसे में आ गई थी। अब ऐसा नहीं होगा। जनता उनकी गलतफहमी दूर कर देगी।       
- मदन कौशिक, भाजपा प्रत्याशी और विधायक, हरिद्वार नगर  

सीएम हरीश रावत के हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव में उतरने से कांग्रेस जिले में पूरी ताकत के साथ खड़ी हो गई है। अब जिले में भाजपा का सूपड़ा साफ होना तय है। कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है।  
- पुरुषोत्तम शर्मा, पूर्व ओएसडी सीएम

मुख्यमंत्री की ऐतिहासिक जीत के साथ ही जिले में कांग्रेस कई सीटें जीतेगी। नई सरकार बनने का रास्ता हरिद्वार जिले से ही तय होगा। 
- अंशुल श्रीकुंज अध्यक्ष महानगर हरिद्वार 
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2009 का इतिहास दोहरा पाएंगे हरीश रावत?

हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
मुख्यमंत्री हरीश रावत के हरिद्वार ग्रामीण सीट से विधानसभा चुनाव में टिकट मिलने के बाद अब उनके सामने वर्ष 2009 का इतिहास दोहराने की चुनौती है। यह चुनाव उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से भी कम नहीं है। वहीं, अब हरिद्वार जिला राजनीतिक लिहाज से हॉट हो गया है।

अब हरीश रावत खुद हरिद्वार ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में जिले में कांग्रेस की ताकत बढ़नी तय मानी जा रही है। असल में ये विधानसभा चुनाव उनका राजनीतिक कद भी तय करेंगे। सीएम रहते उनका अक्सर हरिद्वार आना-जाना होता था। इस लिहाज से हरिद्वार जिले के विधानसभा सीटों पर विजयी पताका फहराना उनके लिए महत्वपूर्ण है। वह हरिद्वार के लिए नए भी नहीं है क्योंकि वर्ष 2009 में यहां की ही जनता ने उन्हें चुनकर संसद भेजा था।

पहाड़ की राजनीति से सीधे मैदान में उतरे हरीश रावत ने वर्ष 2009 में हरिद्वार से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में कदम रखा, तब उन्हें केंद्रीय मंत्री की भी जिम्मेदारी मिली। बड़ी बात यह थी कि पहाड़ व मैदान के भेदभाव को दरकिनार कर हरिद्वार की जनता ने हरिद्वार सीट छोड़कर सभी विधानसभा सीटों पर उनका साथ दिया था।

हालांकि, पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में उनकी पत्नी रेणुका रावत को यहीं से हार का मुंह देखना पड़ा, तब केवल भगवानपुर विधानसभा की जनता ही कांग्रेस के पक्ष में खड़ी दिखाई दी थी। केवल वही एक विधानसभा क्षेत्र था जहां से रेणुका आगे रही थीं। हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव का मिजाज भी अलग-अलग होता है।
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