भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के संबंध में अगर केंद्र सरकार 25 मेगावाट तक की जलविद्युत परियोजनाओं की अनुमति दे देती है तो उत्तराखंड को सालाना दो हजार करोड़ रुपये राजस्व मिलेगा।
मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए ज्ञापन में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इको सेंसिटिव जोन में 25 मेगावाट तक की जल विद्युत परियोजनाएं लगाए जाने के संबंध में छूट मांगी है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश और वेस्टर्न घाट (नार्थ ईस्ट) का पुख्ता तर्क भी दिया गया है।
उत्तराखंड की आय का एक बड़ा हिस्सा जल विद्युत परियोजनाओं से आता है, लेकिन भागीरथी इको सेंसिटिव जोन की अधिसूचना जारी होने के बाद इन परियोजनाओं को झटका लगा था। यहां दो मेगावाट तक की परियोजनाएं लगाने की ही अनुमति दी गई।
जल विद्युत परियोजनाओं पर रोक लगने से प्रदेश ने 17 हजार करोड़ रुपये पूंजी निवेश का अवसर खो दिया था। हालांकि प्रदेश शासन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देकर बताता रहा कि 25 मेगावाट तक की परियोजनाओं से नदी के प्रवाह में कोई बाधा नहीं आएगी।
बाद में यह मामला केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति में रखा गया। इस पर समिति ने कई मामलों में ढील देते हुए भागीरथी इको सेंसिटिव जोन का जोनल मास्टर प्लान फिर से बनाने के लिए कहा। जोनल मास्टर प्लान में भी 25 मेगावाट तक की परियोजनाओं को छूट दिए जाने की संस्तुति की गई।
भागीरथी इको सेंसिटिव जोन जैसे हिमाचल के भूक्षेत्र में परियोजनाएं लगाने की अनुमति है। एक महीना से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन केंद्र ने जोनल मास्टर प्लान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस संबंध में एनजीटी में 29 दिसंबर को सुनवाई भी होनी है। अगर केंद्र स्वीकृति दे देता है तो क्षेत्र के विकास में तेजी आएगी।