12769 करोड़ की चारधाम महामार्ग परियोजना स्वीकृत
सीएम ने कहा, चारधाम यात्रा को सुगम, सुलभ एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्गों पर 12,769 करोड़ रुपये की चारधाम महामार्ग परियोजना स्वीकृत की गई है। उत्तराखंड में कुल 3,723 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क राज्य को देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ रहा है।
उन्होंने कहा लगभग 597 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग एनएचएआई की ओर से क्रियान्वित किए गए हैं, जिनमें से 336 किलोमीटर से अधिक परियोजनाएं पूर्ण भी हो चुकी हैं। वहीं लगभग 193 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसकी अनुमानित लागत 15,890 रुपये करोड़ से अधिक है। इन परियोजनाओं के माध्यम से हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, रुद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी और काठगोदाम जैसे धार्मिक, शहरी और औद्योगिक केंद्रों को चौड़ी, सुरक्षित एवं सुगम सड़कों से जोड़ा गया है। काशीपुर-सितारगंज, रुद्रपुर-काठगोदाम व हरिद्वार-नगीना फोरलेन कॉरिडोर से औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि मंडियों और पर्यटन स्थलों तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
गणेशपुर में 30 किमी लंबा छह लेन हाईवे तैयार
दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर के तहत गणेशपुर-देहरादून खंड में लगभग 30 किमी लंबा छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे विकसित किया गया है, जिसमें सुरंग और 18 किमी लंबा एलिवेटेड सेक्शन भी शामिल है। इस परियोजना पर 1,995 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इसके अलावा 716 करोड़ की देहरादून बाईपास व 1603 करोड़ से हरिद्वार बाईपास परियोजनाओं से शहरी क्षेत्रों में यातायात दबाव कम होगा। भारत-नेपाल सीमा पर बनबसा आईसीपी कनेक्टिविटी को चार किमी लंबाई तक 366 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय आवागमन व व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
हरिद्वार-हल्द्वानी हाई स्पीड कॉरिडोर की बन रही डीपीआर
10 हजार करोड़ की लागत से हरिद्वार-हल्द्वानी हाई-स्पीड कॉरिडोर की डीपीआर तैयार की जा रही है। इस कॉरिडोर की लंबाई 197 किमी होगी। इसके अलावा चार हजार करोड़ से मसूरी-देहरादून कनेक्टिविटी, देहरादून रिंग रोड व लालकुआं-हल्द्वानी-काठगोदाम बाईपास डीपीआर बनाई जा रही है। सीएम ने कहा, सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में सिविल कार्य लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। 10 प्रतिशत सिविल कार्य में सुरंग के बीचों-बीच दीवार निर्माण का काम पांच से छह माह में पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल काम शुरू होंगे। मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है।