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उखड़ने लगे तंबू, समापन की ओर नासिक कुंभ

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नासिक और त्र्यंबकेश्वर में चल रहा कुंभ अब समापन पर है। नासिक में आखिरी स्नान हो चुका है और कुंभनगर के तंबू उखड़ने शुरू हो गए हैं।
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जबकि त्र्यंबकेश्वर में 25 सितंबर को शाही स्नान होने जा रहा है। 10 अखाड़े इस स्नान में शाही जुलूस निकालेंगे। 28 सितंबर को अखाड़ा ने कढ़ी-पकौड़ा भोज रखा है। यह भोज होते ही नागा संन्यासी रेलवे स्टेशन के लिए रवाना होने शुरू हो जाएंगे।

संन्यासियों में ‘कढ़ी-पकौड़ा बेसन का....रस्ता पकड़ो टेशन (स्टेशन) का’ नारा बहुत प्रचलित है। जब भी कुंभ का समापन किसी नगर में होता है, तब कुंभ में आए साधु-संन्यासियों को आखिरी प्रतीक्षा कढ़ी-पकौड़ा की रहती है। इस बार संन्यासियों, उदासियों और निर्मलों का आखिरी शाही स्नान 25 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। यह स्नान त्र्यंबके श्वर में होगा।
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नासिक में हो चुका है आखिरी स्नान

चूंकि नासिक का आखिरी स्नान हो चुका है, बैरागियों के भक्त भी लौट गए हैं। लेकिन जो श्रद्धालु त्र्यंबक का स्नान भी देखना चाहते हैं, वे अब तक रुके हैं। त्र्यंबकेश्वर में वर्षा होने से उतनी रौनक नहीं रह गई है।

लेकिन अंतिम शाही स्नान की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं। नागा संन्यासी इस जुलूस में अपने कई महामंडलेश्वरों को भी आमंत्रित कर चुके हैं। संभावना है कि इस स्नान पर हाथी-घोड़ों की सवारियां भी निकाली जाएंगी।

400 वर्षों से चल रही परंपरा
सिंहस्थ कुंभ मेले में पिछले 400 वर्षों से परंपरा चल रही है कि जूना पीठाधीश्वर भगवान त्र्यंबक की पूजा-अर्चना करते हैं। श्रीमहंत नारायण गिरि ने बताया कि इस पूजा की तैयारियां शुरू हो गई है।

प्रात:काल महाभिषेक किया जाएगा। 108 प्रकार की औषधियों से त्र्यंबक भगवान का अर्चन होगा। महाराज श्री के शिष्य नरसिंहा गिरि सहित प्रभु प्रेम आश्रम संघ के सभी सदस्य उपस्थित रहेंगे।
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