सालभर हिमाच्छादित रहने वाली चोटियों पर नहीं है बर्फ
अध्ययन में सामने आया कि मोटी बर्फ की चादर में निरंतर कमी हो रही है। 1991 से 2021 तक शिखर पर बर्फ अवधि के दौरान मोटी बर्फ का क्षेत्र 10,768 वर्ग किलोमीटर से घटकर 3,258.6 वर्ग किलोमीटर रह गया, जो एक खतरनाक कमी को दर्शाता है।
इसके विपरीत, पतली बर्फ की चादर 1991 में 3,798 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2021 में 6,863.56 वर्ग किलोमीटर हो गई, जिससे इस क्षेत्र में गर्मी बढ़ रही है। कहा, औली और उसके आसपास के क्षेत्रों जो पहले साल भर बर्फ से ढके रहते थे, अब वहां बर्फ गायब हो गई है।
निचले ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे नैनीताल में बर्फबारी की आवृत्ति में भारी कमी आई है। 1990 के दशक में यहां अक्सर बर्फबारी होती थी, लेकिन अब इसकी आवृत्ति दो या तीन वर्षों में एक बार होती है। सिकुड़ते ग्लेशियर से जल की कमी होगी जो पहले से ही जल संकट से जूझ रहे क्षेत्र के लिए खतरा है।