भारतीय वन सर्वेक्षण के विशेषज्ञों की रिपोर्ट के मुताबिक, जनजातीय बहुल जिन राज्यों में आरक्षित वन क्षेत्रों में जंगलों में कमी आई है, उसमें अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गाजीपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, राजस्थान और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। अरुणाचल प्रदेश में 257 वर्ग किमी, मध्य प्रदेश में 101 वर्ग किमी, मणिपुर में 249 वर्ग किमी, मिजोरम में 189 वर्ग किमी और नागालैंड में 235 किमी क्षेत्रफल में वन क्षेत्रफल घटा है।
चार राज्यों में वनों की स्थित कमोबेश ठीक
जहां एक ओर देश के कई जनजातीय बहुल राज्यों में वनों के क्षेत्रफल में कमी आई, वहीं आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा जैसे राज्यों में अभी स्थिति सामान्य है और जनजातीय बहुल जिलों में आरक्षित वन क्षेत्रों में वनों में कमी नहीं दर्ज की गई है।
ये भी पढ़ें...Landslide In Karnprayag: भारी बारिश ने मचाई तबाही, घरों में घुसा मलबा, सड़कें बंद होने से फंसे वाहन, तस्वीरें
देश के जनजातीय बहुल राज्यों में जनजातियों का जीवन काफी कुछ वनों पर आश्रित रहता है, जिससे जनजातीय बहुल जिलों में वनों के क्षेत्रफल में कमी हो रही है। हालांकि, इसे रोकने को लेकर केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ ही संबंधित राज्यों के वन विभाग की ओर से कदम भी उठाए गए, जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए है। - प्रकाश लखचौरा, उप महानिदेशक, भारतीय वन सर्वेक्षण