वर्ष 2012 में केंद्र सरकार की ओर से दिए गए लक्ष्य को शौचालय बनाकर सरकार ने पूरा कर उत्तराखंड को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया। जबकि जमीनी सच्चाई इसके उलट है। गांवों में शौचालय तो बने हैं पर ग्रामीण इनका प्रयोग नहीं कर रहे हैं। इनमें भूसा और उपले भरा जा रहे हैं। इससे साफ है कि ग्रामीण अब भी खुले में शौच कर रहे हैं। ऐसे में फिलहाल भारत स्वच्छ होने का सपना साकार होता नजर नहीं आ रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छ भारत मिशन और नमागि गंगे जैसे अभियानों के तहत हर घर में शौचालय बनाने और खुले में शौच से मुक्ति दिलाने का नारा देकर अनुदान के आधार पर शौचालय बनवाने का काम शुरू किया गया था। जिला हरिद्वार को वर्ष 2012 के आधार पर एक लाख छह हजार शौचालय बनवाने का लक्ष्य स्वजल परियोजना के अंतर्गत मिला था जो वर्ष 2019 तक पूरा किया जाना था।
लेकिन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए जून 2017 में ही इसे पूरा कर लिया। राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को देहरादून में समारोह का आयोजन कर अफसरों की पीठ भी थपथपाई।