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कैसे होगा भारत स्वच्छ का सपना पूरा, टॉयलेट में भरे गोबर के उपले

Sat, 24 Jun 2017 04:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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वर्ष 2012 में केंद्र सरकार की ओर से दिए गए लक्ष्य को शौचालय बनाकर सरकार ने पूरा कर उत्तराखंड को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया। जबकि जमीनी सच्चाई इसके उलट है। गांवों में शौचालय तो बने हैं पर ग्रामीण इनका प्रयोग नहीं कर रहे हैं। इनमें भूसा और उपले भरा जा रहे हैं। इससे साफ है कि ग्रामीण अब भी खुले में शौच कर रहे हैं। ऐसे में फिलहाल भारत स्वच्छ होने का सपना साकार होता नजर नहीं आ रहा है। 
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केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छ भारत मिशन और नमागि गंगे जैसे अभियानों के तहत हर घर में शौचालय बनाने और खुले में शौच से मुक्ति दिलाने का नारा देकर अनुदान के आधार पर शौचालय बनवाने का काम शुरू किया गया था। जिला हरिद्वार को वर्ष 2012 के आधार पर एक लाख छह हजार शौचालय बनवाने का लक्ष्य स्वजल परियोजना के अंतर्गत मिला था जो वर्ष 2019 तक पूरा किया जाना था।

लेकिन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए जून 2017 में ही इसे पूरा कर लिया। राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को देहरादून में समारोह का आयोजन कर अफसरों की पीठ भी थपथपाई। 
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अमर उजाला की टीम को मिले रोचक मामले

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अमर उजाला की टीम ने इस सच को जानने का प्रयास किया तो कई रोचक तथ्य सामने आए। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार स्वजल को वर्ष 2012 तक के लक्ष्य के आधार  पर एक लाख छह हजार दस शौचालय बनाने थे। परियोजना प्रबंधक सोमनाथ सैनी के अनुसार लक्ष्य पूरा कर लिया गया है।

शौचालय बनने भी हैं। श्यामपुर क्षेत्र के कई गांवों में पाया गया कि शौचालय तो बने हैं, लेकिन लोगों ने उनमें गोबर से बने उपले भरे हुए हैं और शौच के लिए जंगल में ही जाते हैं। यह स्थिति कांगड़ी, गाजीवाली समेत कई गांवों में मिली। पथरी, धनौरी और बहादराबाद के भी कई गांवों ऐसे ही हालात हैं। 

स्वजल परियोजना प्रबंधक सोमनाथ सैनी ने बताया कि समाज में जागरूकता का अभाव होने के कारण ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। अब लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए ग्राम समितियों का गठन करेंगे।
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